45 डिग्री की गर्मी में भी नहीं लौटे विदेशी मेहमान, जोधपुर झाल में रुके हुए हैं प्रवासी पक्षी, विशेषज्ञों ने जताई पर्यावरणीय बदलाव की आशंका
मथुरा। यूरोप, साइबेरिया और मध्य एशिया के शीत प्रदेशों से हर वर्ष सर्दियों में ब्रज क्षेत्र आने वाले प्रवासी पक्षियों के व्यवहार में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सामान्यतः अप्रैल के अंत तक अपने मूल प्रजनन स्थलों की ओर लौट जाने वाली कई विदेशी पक्षी प्रजातियां जून की शुरुआत तक भी मथुरा के जोधपुर झाल वेटलैंड में डेरा डाले हुए हैं। भीषण गर्मी और लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद इन पक्षियों की मौजूदगी ने पक्षी विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञ इसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव से बदलती वायु धाराओं का परिणाम मान रहे हैं।

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित जोधपुर झाल वेटलैंड इन प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित शरणस्थली बना हुआ है। बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) द्वारा किए जा रहे नियमित पक्षी सर्वेक्षण में पाया गया कि ब्लैक-टेल्ड गोडविट, रफ, सिट्रिन वेगटेल, स्टिंट, कॉमन रेडशैंक, स्पॉटेड रेडशैंक और ग्रीनशैंक जैसी शीतकालीन प्रवासी प्रजातियां मई के अंतिम सप्ताह तक भी यहां मौजूद रहीं। इनमें से कई प्रजातियां 10 से 12 पक्षियों के समूह में देखी गई हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति सामान्य प्रवास चक्र से अलग है। आमतौर पर ये पक्षी अप्रैल तक उत्तर दिशा में स्थित अपने प्रजनन स्थलों के लिए लौट जाते हैं, लेकिन इस वर्ष उनकी वापसी में असामान्य विलंब देखा जा रहा है।
बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के.पी. सिंह ने बताया कि प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर की लंबी यात्रा के दौरान प्राकृतिक वायु धाराओं का सहारा लेते हैं। अनुकूल हवाएं उनकी उड़ान को आसान बनाती हैं, जबकि विपरीत दिशा की हवाएं उनकी यात्रा को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि यदि वायु प्रवाह के पैटर्न में बदलाव होता है तो पक्षियों की प्रवास गति, ऊर्जा संतुलन और प्रजनन चक्र पर सीधा असर पड़ता है। वर्तमान परिस्थितियां इसी प्रकार के व्यापक पर्यावरणीय परिवर्तन की ओर संकेत कर रही हैं।
डा. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय की शोधार्थी निधि यादव ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव से वैश्विक स्तर पर वायु धाराओं के स्वरूप में परिवर्तन आया है। इसके कारण अनेक प्रवासी पक्षियों को अपनी वापसी यात्रा टालनी पड़ रही है। यही वजह है कि वे जोधपुर झाल, केवलादेव और सूरसरोवर जैसे महत्वपूर्ण वेटलैंड्स पर अपेक्षाकृत अधिक समय तक ठहरे हुए हैं।
विदेशी पक्षियों की लगातार मौजूदगी को देखते हुए जोधपुर झाल वेटलैंड के सभी जलीय क्षेत्रों में विशेष जल प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पक्षियों के लिए पर्याप्त जल, भोजन और सुरक्षित आवास उपलब्ध रहे, जिससे उनके ठहराव के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन ने कहा कि प्रवासी पक्षियों के इस असामान्य ठहराव को गंभीरता से लिया जा रहा है। उनके लिए आवश्यक जल, भोजन और सुरक्षित आवास की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। साथ ही पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रभावों को समझने और पक्षी संरक्षण को और मजबूत बनाने के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी पक्षियों के प्रवास पैटर्न में आ रहा यह बदलाव केवल पक्षी विज्ञान का विषय नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन का महत्वपूर्ण संकेत भी है। यदि ऐसे बदलाव लगातार बढ़ते रहे तो भविष्य में जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र पर इसके दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।