भारत और ब्रिटेन में एफटीए पर आज हस्ताक्षर, पीएम लंदन पहुंचे

लंदन। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिटेन पहुंच गए हैं। यहां वह आज (गुरुवार) ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर हस्ताक्षर करेंगे। इस समझौते से चमड़ा, जूते और कपड़ों जैसे भारतीय उत्पादों का निर्यात सस्ता होगा। वहीं, ब्रिटेन से आने वाली व्हिस्की और कारों के दाम भी कम होंगे। इस समझौते का लक्ष्य है कि 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को दोगुना करके 120 अरब डॉलर तक पहुंचाया जाएगा। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करेगा। सिर्फ इतना ही नहीं, इससे अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप को सीधे मैसेज दिया जाएगा कि समझौते डांट-डपट या टैरिफ की धमकी से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास से होते हैं। यह भारत की 'इंतजार करो' की रणनीति की बड़ी जीत भी है।

Jul 24, 2025 - 07:28
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भारत और ब्रिटेन में एफटीए पर आज हस्ताक्षर, पीएम लंदन पहुंचे

भारत और ब्रिटेन के बीच एफटीए किसी जल्दबाजी या आर्थिक दबाव के कारण नहीं हुआ है। अलबत्‍ता, यह धैर्यपूर्ण कूटनीति और एक-दूसरे की 'रेड लाइन' (ऐसी सीमाएं जिन पर कोई समझौता नहीं होगा) के प्रति सम्मान का नतीजा है। यह समझौता ट्रंप की 'टैरिफ से चलने वाली रणनीति' से बिल्कुल अलग है। इससे अमेरिका को कई महत्वपूर्ण बातें समझने को मिलेंगी।  

भारत-ब्रिटेन एफटीए पर 2022 में बातचीत शुरू हुई थी। इसे मई 2025 में पूरा किया गया। बीच में कई बार समय-सीमाएं चूकीं। मसलन, दिवाली 2022 की डेडलाइन। लेकिन, दोनों देशों ने जल्दबाजी में कोई समझौता करने के बजाय इंतजार किया। एक संतुलित और टिकाऊ समझौता करने के लिए जरूरी समय लिया। यह ट्रंप के उस रवैये से बिल्कुल अलग है जहां वह अक्सर टैरिफ की धमकी देकर और मनमानी समयसीमा तय करके व्यापार समझौतों को जल्दबाजी में पूरा करना चाहते हैं। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में भी ट्रंप ने ऐसी ही डेडलाइन तय की हैं, जो अक्सर पार हो जाती हैं। लेकिन, कोई ठोस समझौता नहीं होता। भारत-ब्रिटेन डील दिखाती है कि धैर्य और रणनीतिक सोच से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

भारत-ब्रिटेन समझौता एक मिसाल है। यह इस बात का उदाहरण है कि कैसे मजबूत और दीर्घकालिक व्यापारिक साझेदारियां डर या दबाव पर नहीं, बल्कि विश्वास और सम्मान पर बनती हैं। दोनों देशों ने अपनी मुख्य मांगों पर समझौता नहीं किया। लेकिन, साझा जमीन तलाशने के लिए वास्तविक राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई। इसके उलट ट्रंप प्रशासन की रणनीति टैरिफ की धमकियों और जबरदस्ती पर बहुत अधिक निर्भर करती है। इससे भारत जैसे संप्रभुता और नीतिगत स्वतंत्रता को महत्व देने वाले पार्टनर्स को दूर करने का जोखिम रहता है। यह डील अमेरिका को संदेश देती है कि कूटनीति और सम्मान ही स्थायी समझौतों की कुंजी हैं।

भारत, ब्रिटेन और अमेरिका जैसी बड़ी और विविध अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार वार्ताओं में जटिल नीतिगत, कानूनी और राजनीतिक मुद्दे शामिल होते हैं। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। इसकी गहरी आर्थिक प्राथमिकताएं और राजनीतिक संवेदनशीलताएं हैं। टैरिफ संरचनाओं से लेकर श्रम गतिशीलता और सामाजिक सुरक्षा अधिकारों तक के मुद्दे लाखों हितधारकों को प्रभावित करते हैं। भारत-ब्रिटेन डील दिखाती है कि इन जटिलताओं को छोटी समयसीमा या आर्थिक दंड की धमकी देकर हल नहीं किया जा सकता। अमेरिका को यह समझना चाहिए कि भारत जैसे देश अपनी आंतरिक संवेदनशीलता के कारण जल्दबाजी में कोई भी समझौता नहीं करेंगे।