मथुरा के पाञ्चजन्य ऑडिटोरियम में 10 जून को होगा हार्टफुलनेस ध्यान सत्र, पद्म भूषण दाजी देंगे आध्यात्मिक मार्गदर्शन
मथुरा। आध्यात्मिक चेतना, आंतरिक शांति और हृदय आधारित जीवनशैली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वैश्विक आध्यात्मिक संस्था हार्टफुलनेस के तत्वावधान में 10 जून 2026 को मथुरा में विशेष ध्यान सत्र आयोजित किया जाएगा। डेम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य ऑडिटोरियम में सायं 5 बजे होने वाले इस कार्यक्रम में हार्टफुलनेस के वैश्विक मार्गदर्शक एवं पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. कमलेश डी. पटेल साधकों और श्रद्धालुओं को ध्यान एवं आध्यात्मिक जीवन के विभिन्न आयामों पर मार्गदर्शन देंगे।
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा ने बताया कि इस ध्यान सत्र का मुख्य उद्देश्य लोगों को हृदय-आधारित ध्यान पद्धति के माध्यम से आंतरिक शांति, प्रेम, संतुलन और आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ना है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साधकों, युवाओं, शिक्षाविदों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों के शामिल होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि पद्म भूषण सम्मानित डॉ. कमलेश डी. पटेल, जिन्हें विश्वभर में "दाजी" के नाम से जाना जाता है, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के आमंत्रण पर 9 जून से 12 जून 2026 तक मथुरा प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे केवल ध्यान सत्र में ही भाग नहीं लेंगे, बल्कि ब्रज क्षेत्र के संरक्षण और विकास से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का भी अवलोकन करेंगे।
ब्रज की प्रमुख परियोजनाओं पर होगा मंथन
मथुरा प्रवास के दौरान दाजी परिषद की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श करेंगे। इनमें ब्रज क्षेत्र के प्राचीन कुंडों का पुनर्जीवन, गोवर्धन क्षेत्र में हरित विकास, पौराणिक वन स्थलों का संरक्षण तथा वाटर म्यूजियम की स्थापना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त वे विभिन्न स्थलों का निरीक्षण कर परियोजनाओं की प्रगति का जायजा भी लेंगे तथा पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के संबंध में सुझाव देंगे।
आध्यात्म और विकास का होगा संगम
आयोजकों का मानना है कि यह कार्यक्रम आध्यात्मिक साधना और ब्रज क्षेत्र के सतत विकास के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करेगा। ध्यान सत्र के माध्यम से जहां लोगों को मानसिक शांति और आत्मिक ऊर्जा प्राप्त होगी, वहीं ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को भी नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम में मथुरा एवं आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं, साधकों और गणमान्य नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर ध्यान सत्र का लाभ उठाने की अपील की गई है।