टीटीजेड में निवेशकों की बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ेंगे प्रस्ताव
सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के आदेश के बाद टीटीजेड में उद्योगों की मंजूरी प्रक्रिया सख्त कर दी गई। हर आवेदन की जांच एसडीएम , उपायुक्त उद्योग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तीन सदस्यीय समिति करेगी। नीरी और सीईसी के विशेषज्ञों की मौजूदगी के बिना मंजूरी संबंधी बैठक नहीं होगी। किसी विशेषज्ञ की आपत्ति होने पर मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट जाएगा। मंजूर परियोजनाओं की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और आपत्तियों पर मंजूरी भी रुक सकती है। करीब 410 लंबित औद्योगिक प्रस्ताव नई प्रक्रिया से प्रभावित हो सकते हैं। आगरा-भरतपुर हाईवे सहित अन्य विकास परियोजनाओं में भी देरी की आशंका जताई गई है।
आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना और मौजूदा उद्योगों के विस्तार को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के आदेश का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। गुरुवार को मंडलायुक्त नगेन्द्र प्रताप की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में कोर्ट के निर्देशों को लागू करने के लिए नई प्रक्रिया तय की गई। अधिकारियों का मानना है कि इससे पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, लेकिन उद्योगों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी में पहले की तुलना में अधिक समय लग सकता है। बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल, आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) की उपाध्यक्ष एम. अरून्मौली, उपायुक्त उद्योग शैलेन्द्र सिंह, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि समेत कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
तीन सदस्यीय समिति करेगी हर आवेदन की जांच
बैठक में निर्णय लिया गया कि अब उद्योगों से जुड़े प्रत्येक आवेदन की जांच तीन सदस्यीय समिति करेगी। इस समिति में संबंधित उपजिलाधिकारी (एसडीएम), उपायुक्त उद्योग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी शामिल होंगे। समिति उद्योग इकाई का पूरा विवरण, भूमि उपयोग (Land Use), उद्योग की श्रेणी, वायु प्रदूषण स्कोर, पर्यावरणीय प्रभाव, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अन्य सभी आवश्यक दस्तावेजों की विस्तार से जांच करेगी। दस्तावेजों के साथ-साथ मौके पर भौतिक सत्यापन भी अनिवार्य होगा।
विशेषज्ञों की मौजूदगी के बिना नहीं होगी बैठक
नई व्यवस्था के तहत टीटीजेड प्राधिकृत समिति की बैठक अब तभी होगी जब उसमें नीरी (NEERI) और सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के विशेषज्ञ उपस्थित होंगे। यदि किसी एक विशेषज्ञ ने भी किसी प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज कर दी, तो उस मामले को अंतिम निर्णय के लिए फिर से सुप्रीम कोर्ट के समक्ष भेजा जाएगा। इस व्यवस्था से उद्योगों की मंजूरी की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक विस्तृत और समय लेने वाली हो सकती है।
मंजूरी के बाद भी अटक सकते हैं प्रोजेक्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार जिन उद्योगों या परियोजनाओं को मंजूरी दी जाएगी, उनकी जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। यदि सार्वजनिक सूचना के बाद किसी व्यक्ति या संस्था की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो मंजूरी मिलने के बाद भी परियोजना पर रोक लग सकती है। इससे निवेशकों और उद्यमियों के लिए अनिश्चितता की स्थिति बनी रह सकती है।
410 लंबित आवेदनों पर पड़ सकता है असर
वर्तमान में टीटीजेड क्षेत्र में उद्योगों की स्थापना और विस्तार से जुड़े लगभग 410 आवेदन लंबित हैं। नई प्रक्रिया लागू होने के बाद इन सभी मामलों की दोबारा विस्तृत जांच होने की संभावना है, जिससे इनके निस्तारण में देरी हो सकती है।
विकास परियोजनाओं पर भी असर
बैठक में आगरा-भरतपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े पेड़ों के कटान के मामले पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। माना जा रहा है कि सड़क निर्माण, आधारभूत ढांचा विकास और अन्य सार्वजनिक परियोजनाओं की मंजूरी भी नई व्यवस्था के कारण प्रभावित हो सकती है।
अंतिम नीति बनने तक बनी रहेगी अनिश्चितता
अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप विस्तृत नीति तैयार होने तक टीटीजेड क्षेत्र में उद्योगों और निवेशकों को नई प्रक्रिया के तहत ही आवेदन करने होंगे। अंतिम नीति लागू होने तक मंजूरी की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रहने की संभावना है।