एससीओ की बैठक में दुनिया के ताकतवर नेताओं संग शक्ति प्रदर्शन करेंगे जिनपिंग
बीजिंग। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन समेत दुनिया के 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा लेंगे। इस दौरान एससीओ के देश एक संयुक्त घोषणापत्र पर भी हस्ताक्षर करेंगे। इसके अलावा सदस्य देश एससीओ विकास रणनीतिक को मंजूरी देंगे और सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर भी चर्चा करेंगे। एससीओ के घोषणापत्र में अमेरिका की टैरिफ नीति को करारा जवाब दिया जाने की संभावना है।
चीन ने पहले ही इशारा कर दिया है कि वह इस सम्मेलन का इस्तेमाल अमेरिका को घेरने के लिए करेगा। उसने पहले ही अमेरिका पर विश्व शांति के लिए खतरा होने का आरोप लगाया है। उसने वैश्विक नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक से ठीक पहले अमेरिका की जबरदस्त आलोचना की है। चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने शुक्रवार को बीजिंग में एक ब्रीफिंग के दौरान बताया कि शंघाई सहयोग संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन में 20 से ज्यादा विदेशी नेता शामिल होंगे।
सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने शुक्रवार को बीजिंग में एक ब्रीफिंग के दौरान संवाददाताओं को बताया कि रूस और चीन के नेतृत्व वाले देशों के समूह, शंघाई सहयोग संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन में 20 से ज्यादा विदेशी नेता शामिल होंगे। रूस के व्लादिमीर पुतिन, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन उन लोगों में शामिल हैं जिनके चीन के पूर्वोत्तर बंदरगाह शहर तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल होने की उम्मीद है।
लियू ने इस बैठक को "एक खास देश" के चरित्र से अलग एक कदम बताया, जो "अपने राष्ट्रीय हित को दूसरों के हित से ऊपर रखना चाहता है।" जाहिर है कि चीन का इशारा अमेरिका की ओर था, जो पूरी दुनिया में टैरिफ युद्ध छेड़े हुए है। लियू ने कहा, "एससीओ के मार्गदर्शक सिद्धांत और मूल भावना" "सभ्यताओं के टकराव, शीत युद्ध की मानसिकता और जीरो-सम-गेम (एक की जीत में दूसरे की हार) जैसी पुरानी अवधारणाओं" से परे हैं। यह "समय के साथ और भी मजबूत हुआ है।"
एससीओ की स्थापना चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज़्बेकिस्तान ने 2001 में की थी। वर्तमान में एससीओ के सदस्य देशों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। 24 जून 2016 को भारत और पाकिस्तान भी एससीओ के सदस्य चुने गए थे। ईरान और बेलारूस भी एससीओ के सदस्य हैं। इसके अलावा मंगोलिया और सऊदी अरब पर्यवेक्षक के रूप में इसमें शामिल हैं।