राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर महिलाओं को बड़ी सौगात, 'समर्थ' योजना से मिलेगा हुनर, मानदेय और करघा
परखम/आगरा। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय, बुनकर सेवा केंद्र मेरठ तथा दीनदयाल बुनकर केंद्र, गऊ ग्राम परखम के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस-2026 के अवसर पर 'समर्थ' योजना के अंतर्गत 45 दिवसीय हथकरघा बुनाई प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ अशोक सिंघल हॉल, गऊ ग्राम परखम में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हथकरघा उद्योग के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. धर्मवीर प्रजापति ने कहा कि 'समर्थ' योजना के माध्यम से महिलाओं और युवाओं को प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार प्रशिक्षित महिलाओं को आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगी।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय गौसेवा के अजीत महापात्रा ने कहा कि हथकरघा केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि ग्रामीण महिलाएं घर से उत्पादन कर बाजार से जुड़ेंगी तो परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के राज्यमंत्री उपाध्यक्ष वीरेंद्र सेमवाल ने कहा कि हथकरघा क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। आवश्यकता इस बात की है कि पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, गुणवत्ता और विपणन व्यवस्था से जोड़ा जाए। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम बुनकरों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेंगे।
वस्त्र मंत्रालय के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपनिदेशक तपन शर्मा ने कहा कि समर्थ' योजना के तहत प्रशिक्षणार्थियों को तकनीकी दक्षता, उत्पादन क्षमता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों से पूरे मनोयोग के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया।
दीनदयाल बुनकर प्रशिक्षण केंद्र के उपाध्यक्ष दीपक अग्रवाल ने बताया कि 45 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में 30 महिलाओं को हथकरघा बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के मुख्य प्रशिक्षक मोदा राम (राजस्थान) होंगे, जबकि सहायक प्रशिक्षक भभूता राम एवं महेंद्र प्रशिक्षण देंगे।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी महिला को प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन ₹300 का मानदेय दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद परीक्षा आयोजित की जाएगी तथा सफल प्रतिभागियों को लगभग ₹30 हजार लागत का करघा उपलब्ध कराया जाएगा, जिस पर निर्धारित सरकारी अनुदान का लाभ भी मिलेगा।
कार्यक्रम में संस्था के मंत्री नितिन बहल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में 17 गांवों की महिलाएं भाग ले रही हैं। हरिशंकर शर्मा ने कहा कि प्रत्येक घर तक करघा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। महिलाओं को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराया जाएगा तथा उनके द्वारा तैयार उत्पादों की मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी संस्था निभाएगी, ताकि उन्हें उनके श्रम का उचित मूल्य मिल सके।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को हथकरघा क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार के अवसर, भारत सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा 'समर्थ' योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षणार्थियों को टूल किट भी वितरित की गई।
कार्यक्रम का संचालन अजय वर्मा ने किया। इस अवसर पर दीनदयाल धाम के निदेशक सोनपाल, राहुल गोयल, अर्पित माहेश्वरी, उदित बंसल, शशिकांत, राम पाठक, किशन, अशोक, रामवीर फौजदार, महिपाल सिंह, पारस, राजदर्शन, राजेंद्र प्रधान, गोविन्द, हरिनारायण, हरेंद्र, गौरी, जगन प्रधान सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं प्रशिक्षणार्थी उपस्थित रहे।