एनजीटी सदस्य डॊ. अफरोज अहमद की सख्त चेतावनी: झीलों पर कब्जा बर्दाश्त नहीं, अतिक्रमण हटाओ और पर्यावरण बचाओ, ट्रीटेड वाटर के उपयोग और अतिरिक्त एसटीपी स्थापना के दिए निर्देश
-आरके सिंह- बरेली। पर्यावरण संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की प्रधान न्यायपीठ, नई दिल्ली के सदस्य/न्यायाधीश डॉ. अफरोज अहमद ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनपद की सभी झीलों का तत्काल डिमार्केशन कराया जाए और उन पर हुए अतिक्रमण को बिना देरी हटाया जाए। उन्होंने कहा कि झीलों तक पानी पहुंचाने वाले प्राकृतिक मार्गों को बाधामुक्त रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, भूजल संवर्धन, ट्रीटेड वाटर के उपयोग, अतिरिक्त एसटीपी स्थापना और जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।
सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन और पर्यावरणीय विषयों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. अफरोज अहमद ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनपद में स्थित सभी झीलों का सीमांकन कराया जाए तथा यदि किसी झील पर अवैध कब्जा पाया जाता है तो उसे तत्काल हटाने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि झीलों तक पानी पहुंचने वाले प्राकृतिक जलमार्गों को भी संरक्षित रखा जाए ताकि जल संरक्षण की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
उन्होंने सरकारी भूमि की पहचान कर उसे प्रशासनिक नियंत्रण में लेने तथा उन स्थलों पर अधिक से अधिक पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि झीलें केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं हैं, बल्कि भूजल स्तर को रिचार्ज करने, मत्स्य पालन, सिंघाड़ा उत्पादन और स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बैठक के दौरान डॉ. अफरोज अहमद ने कृषि क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि खेतों में आवश्यकता से अधिक नाइट्रोजन के प्रयोग से गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसानों को रासायनिक कीटनाशकों और उर्वरकों के स्थान पर जीवामृत तथा अन्य जैविक खादों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाए, जिससे मिट्टी की उर्वरता और गुणवत्ता सुरक्षित रह सके।
बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी दीक्षा भंडारी ने जानकारी दी कि बरेली वन प्रभाग द्वारा फरीदपुर क्षेत्र में रिछा वेटलैंड विकसित किया गया है। इसके साथ ही जनपद में संचालित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और एयर यूनिट रिंग सिस्टम की प्रगति से भी अवगत कराया गया। इस पर डॉ. अफरोज अहमद ने निर्देश दिए कि क्रिकेट स्टेडियम सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर ताजे पानी के बजाय एसटीपी से शुद्ध किए गए ट्रीटेड वाटर का उपयोग किया जाए। उन्होंने कृषि सिंचाई में भी ट्रीटेड वाटर के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर बल दिया।
पर्यावरणीय ढांचे को मजबूत करने के लिए जनपद में अतिरिक्त एसटीपी स्थापित करने की दिशा में कार्य तेज करने के निर्देश दिए गए। बैठक में बताया गया कि सात नालों को टैप कर 50 एमएलडी से अधिक क्षमता वाला एक नया एसटीपी प्रस्तावित किया गया है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।
औद्योगिक प्रदूषण पर चर्चा करते हुए डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि कई स्थानों पर उद्योगों द्वारा बिना उपचारित जल को नदियों में छोड़े जाने के कारण गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कानपुर में कराए गए रक्त परीक्षणों में अनेक लोगों के रक्त में मरकरी के अंश पाए गए, जबकि भूजल में क्रोमियम की बढ़ती मात्रा का प्रमुख कारण भी औद्योगिक अपशिष्ट जल माना गया है।
उन्होंने नई आवासीय कॉलोनियों में पर्याप्त हरित क्षेत्र सुनिश्चित करने, सड़कों के किनारे बड़े स्तर पर वृक्षारोपण कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के निर्देश भी दिए। बैठक के उपरांत डॉ. अफरोज अहमद ने कलेक्ट्रेट परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
बैठक में जिलाधिकारी अविनाश सिंह, मुख्य विकास अधिकारी देवयानी, नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य, अपर जिलाधिकारी प्रशासन पूर्णिमा सिंह, प्रभागीय वनाधिकारी दीक्षा भंडारी, मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. विश्राम सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी, पुलिस अधीक्षक उत्तरी, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, सचिव बरेली विकास प्राधिकरण, नगर पालिका एवं नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।