पाक ने अमेरिका से भारत के हमले रुकवाने को मदद की भीख मांगी थी
इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के संघर्ष ने दोनों देशों की सैन्य ताकत में बड़े अंतर को साफ दिखा दिया है। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। इसके जरिए भारत ने पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया था। हालांकि, इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमले की नाकाम कोशिश की थी। जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान के 11 मिलिट्री बेसों पर हमला कर उन्हें धुआं-धुआं कर दिया था। इनमें पाकिस्तान के बीचों-बीच स्थित नूर खान एयरबेस भी शामिल है, जिसे पाकिस्तानी सेना का कमांड सेंटर माना जाता है। इन हमलों ने पाकिस्तान को इतना डरा दिया था कि उसने अमेरिका से मदद की भीख मांगी थी।
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस पर हमले के बाद मोदी सरकार ने आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया, क्योंकि पाकिस्तान भारत का मुकाबला नहीं कर सकता। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की हार का अंदाजा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा 10 मई की सुबह भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल से संपर्क करने के लिए किए गए प्रयासों से लगाया जा सकता है।
10 मई को नूर खान एयरबेस पर तड़के भारतीय मिसाइलों ने जोरदार हमला किया था। उसी दिन सुबह 10:38 बजे पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) काशिफ अब्दुल्ला ने अपने भारतीय समकक्ष को फोन करके कराची नौसैनिक बंदरगाह पर ब्रह्मोस मिसाइल हमले के बारे में खुफिया जानकारी होने का दावा किया। हालांकि पाकिस्तानी डीजीएओ ने जवाबी कार्रवाई की धमकी देने की कोशिश की, लेकिन भारतीय पक्ष बेफिक्र रहा और पूरी तरह से युद्ध के लिए तैयार रहा।
यह समझा जाता है कि जब विदेश मंत्री रुबियो ने संघर्ष विराम पर सहमत होने की पाकिस्तान की इच्छा से अवगत कराया, तो विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दृढ़ता से लेकिन विनम्रता से जवाब दिया कि इस तरह के प्रस्ताव को डीजीएमओ चैनलों के माध्यम से आने की आवश्यकता होगी, क्योंकि सशस्त्र बल ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे। इस बीच, भारत ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री और इस्लामाबाद के पारंपरिक सहयोगी देशों के फोन कॉल को नजरअंदाज कर दिया, जिसमें शत्रुता को समाप्त करने का आग्रह किया गया था।
भारत पर तनाव कम करने का कोई दबाव नहीं था, खासकर तब जब दुश्मन के 11 हवाई ठिकानें नष्ट हो चुके थे और उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया था। भारत का बलूचिस्तान या पश्तून बहुल खैबर पख्तूनख्वा क्षेत्र पर हमला करने का कोई इरादा नहीं था। वास्तव में, भारत ने अभी-अभी शुरुआत की थी। पाकिस्तान में आतंकी ढांचे को नष्ट करने का उसका मिशन उद्देश्य 7 मई की सुबह 25 मिनट के भीतर पूरा हो गया।