रूसी तेल पर ट्रंप के टैरिफ को लेकर जयशंकर ने कहा,  ये दलीलें चीन पर लागू क्यों नहीं होतीं

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह हास्यास्पद है कि जो लोग व्यापार समर्थक अमेरिकी प्रशासन के लिए काम करते हैं, वे दूसरे लोगों पर व्यापार करने का आरोप लगा रहे हैं।

Aug 23, 2025 - 15:15
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 रूसी तेल पर ट्रंप के टैरिफ को लेकर जयशंकर ने कहा,  ये दलीलें चीन पर लागू क्यों नहीं होतीं


मास्को। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर कुल 50 फीसदी का टैरिफ लगाया है। मॉस्को पहुंचे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसको लेकर ट्रंप को जमकर सुनाया। उन्होंने कहा कि अगर भारत पर प्रतिबंधों और टैरिफ की दलीलें दी जाती हैं तो वो दलीलें चीन पर लागू क्यों नहीं होती हैं। चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक देश है, जबकि भारत दूसरे नंबर पर है।

एस जयशंकर ने कहा, 'इसे तेल का मुद्दा बताया जाता है लेकिन चीन, जो रूस से सबसे बड़ा आयातक है, उस पर कोई टैरिफ नहीं लगाया गया। भारत को निशाना बनाने वाली दलीलें चीन पर क्यों लागू नहीं होतीं?' उन्होंने यूरोप और अमेरिका पर भी निशाना साधते हुए कहा, 'अगर आपको रूस से तेल या उसके प्रोडक्ट्स खरीदने में दिक्कत है, तो मत खरीदिए लेकिन यूरोप खरीदता है, अमेरिका खरीदता है। अगर पसंद नहीं तो हमसे मत खरीदिए।'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्षविराम कराए जाने के दावे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत ने कभी किसी की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान संग बातचीत, व्यापार, किसानों के हित और रणनीतिक स्वायत्तता पर सरकार की ‘रेड लाइन्स’ सदैव कायम रहेंगी। एक कार्यक्रम में एस. जयशंकर ने कहा कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष के मुद्दे पर हमने 1970 से लेकर अब तक पिछले पचास वर्षों में किसी की भी मध्यस्थता स्वीकार नहीं की है। उन्होंने जोड़ा कि भारत में हमेशा से राष्ट्रीय सहमति रही है कि हम पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों में मध्यस्थता स्वीकार नहीं करते और यह नीति निरंतरता के साथ बनी रहेगी।

डोनाल्ड ट्रंप को लेकर विदेश मंत्री ने कहा कि हमने कभी ऐसा कोई अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं देखा, जिसने विदेश नीति को ट्रंप की तरह सार्वजनिक रूप से संचालित किया हो। उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रपति ट्रंप का दुनिया के साथ व्यवहार करने का तरीका, और यहां तक कि अपने देश के साथ व्यवहार करने का तरीका भी पारंपरिक रूढ़िवादी तरीके से बहुत बड़ा उतार-चढ़ाव है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि केवल व्यापार के लिए इस तरह से टैरिफ लगाना सामान्य माना जा सकता है, लेकिन गैर-व्यापार मुद्दों पर टैरिफ लगाना सही नहीं है।

विदेश मंत्री ने कहा, 'चीन के साथ हमारी कुछ समस्याएं 1950 के दशक से चली आ रही हैं, जैसे सीमा विवाद, जो आज भी बहुत अहम है। चीन के साथ बातचीत के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना एक पूर्वापेक्षा है। मैं 2009-2013 के बीच चीन में राजदूत था और मैं आपको बता सकता हूं कि नई दिल्ली और बीजिंग के बीच बढ़ता व्यापार घाटा उस समय बढ़ती चिंता का विषय था। गलवान संघर्ष एक कठिन दौर था।'