आईवीआरआई बरेली में वैज्ञानिक महाकुंभः ऊर्जा संकट से खाद संकट तक गौवंश बनेगा भविष्य का आधार!

बरेली। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर में सोमवार को आयोजित बेसिक-2026 वैज्ञानिक महाकुंभ के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य गोसेवा आयोग के सदस्य एवं भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री राजेश सिंह सेंगर ने ऊर्जा, कृषि, पर्यावरण और भारतीय ज्ञान परंपरा को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज पूरा विश्व ऊर्जा संकट और भविष्य के खाद संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में गौवंश और पशुधन इन समस्याओं के समाधान का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।

Jun 2, 2026 - 11:41
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आईवीआरआई बरेली में वैज्ञानिक महाकुंभः ऊर्जा संकट से खाद संकट तक गौवंश बनेगा भविष्य का आधार!
आईवीआरआई बरेली में सोमवार को आयोजित वैज्ञानिक महाकुंभ में मंचस्थ अतिथिगण।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजेश सिंह सेंगर ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को माता का दर्जा केवल धार्मिक आस्था के कारण नहीं दिया गया, बल्कि इसके पीछे गहरा वैज्ञानिक चिंतन और शोध भी निहित रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्व को खाद की भारी कमी का सामना करना पड़ सकता है और इस चुनौती से निपटने में गोबर आधारित जैविक खाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

गोबर की खाद से दूर हो सकता है वैश्विक खाद संकट

राजेश सिंह सेंगर ने बताया कि हाल ही में कृषि मंत्री और पशुपालन मंत्री के साथ हुई चर्चा में भी खाद संकट की संभावनाओं पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहीं तो दुनिया को उर्वरकों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने सुझाव दिया कि गोबर से तैयार जैविक खाद को छोटे-छोटे पैकेटों में किसानों तक पहुंचाया जाए। इससे किसानों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध होगी तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम होगी।

भारतीय ज्ञान परंपरा में छिपे हैं विज्ञान के अनेक रहस्य

अपने संबोधन के दौरान सेंगर ने भारतीय परंपरा और प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता में विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत समन्वय रहा है। भगवान गणेश के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह हमारे प्राचीन ज्ञान और चिकित्सा विज्ञान की उन्नत सोच को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि कालांतर में भारत की अनेक वैज्ञानिक उपलब्धियां उपेक्षित हो गईं, जबकि उनमें आधुनिक विज्ञान के लिए भी कई महत्वपूर्ण संकेत मौजूद हैं।

कमजोर की बात नहीं सुनती दुनिया

राजेश सिंह सेंगर ने समाज और राष्ट्र के सशक्त बनने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि दुनिया हमेशा शक्तिशाली की बात सुनती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बलि हमेशा बकरे की दी जाती है, शेर और हाथी की नहीं।

उन्होंने दोहों और उदाहरणों के माध्यम से कहा कि व्यक्ति, समाज और राष्ट्र को इतना सक्षम बनना चाहिए कि उसकी बात को सम्मानपूर्वक सुना जाए। शक्ति और संस्कार दोनों का संतुलन ही किसी भी समाज को आगे बढ़ाता है।

विज्ञान के साथ चरित्र निर्माण भी जरूरी

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विकास तभी सार्थक है जब उसके साथ चरित्र निर्माण भी हो। केवल तकनीकी प्रगति पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और सकारात्मक सोच का विकास भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में चारों ओर नकारात्मकता का वातावरण दिखाई देता है। ऐसे समय में हमें अच्छाइयों को पहचानने और उन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छाइयों की चर्चा करेंगे तो हमारे भीतर भी सकारात्मकता और श्रेष्ठता का विकास होगा।

वैज्ञानिक महाकुंभ में जुटे विशेषज्ञ और शोधकर्ता

आईवीआरआई में आयोजित बेसिक-2026 वैज्ञानिक महाकुंभ में देशभर के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, पशुपालन विशेषज्ञों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पशुधन, जैविक खेती, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई।

SP_Singh AURGURU Editor