आगरा में शंकराचार्य बोले- गोवध नहीं रोक सकने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं, गविष्टि धर्मयुद्ध यात्रा शहर में पहुंची, किरावली की धर्मसभा में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग

Jun 7, 2026 - 21:53
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आगरा में शंकराचार्य बोले- गोवध नहीं रोक सकने वाली सरकार को सत्ता में रहने का अधिकार नहीं, गविष्टि धर्मयुद्ध यात्रा शहर में पहुंची, किरावली की धर्मसभा में गौमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग
आगरा में धाकरान चौराहे पर धर्मसभा को संबोधित करते शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज।

किरावली/आगरा। गौमाता को राष्ट्रमाता का सम्मान दिलाने और देशभर में पूर्ण गोवंश वध बंदी लागू करने की मांग को लेकर निकाली जा रही 81 दिवसीय ‘गविष्टि (गो-रक्षार्थ-धर्मयुद्ध) यात्रा’ के अंतर्गत रविवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज का आगरा जनपद में स्वागत किया गया। आगरा शहर से लेकर किरावली तक आयोजित धर्मसभाओं में शंकराचार्य ने गौसंरक्षण को राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा का आधार बताते हुए व्यापक जनजागरण का आह्वान किया।

धाकरान चौराहे पर गरजे शंकराचार्य, गोवध पर जताई चिंता

आगरा के धाकरान चौराहे पर आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि भारत में गाय को सदैव माता का दर्जा प्राप्त रहा है, क्योंकि वह कृषि, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी शासनकाल में गाय को केवल एक पशु मान लिया गया था और दुर्भाग्यवश स्वतंत्रता के दशकों बाद भी उस मानसिकता में अपेक्षित परिवर्तन नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि देश में आज भी गोवध और गोमांस का व्यापार जारी है, जो अत्यंत चिंताजनक है। शंकराचार्य ने कहा कि यदि सरकारें वास्तव में गौमाता के सम्मान की बात करती हैं तो उन्हें देशभर में पूर्ण गोवंश वध बंदी लागू करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "जो सरकार गोवध नहीं रोक सकती, उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।"

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का उल्लेख करते हुए कहा कि गौरक्षा के विषय में निर्णायक कदम उठाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि गविष्टि यात्रा किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि गौरक्षा और सांस्कृतिक चेतना के लिए चलाया जा रहा राष्ट्रव्यापी जनआंदोलन है।

धर्मसभा में गौसेवा और गौरक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए महेश धाकड़ को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयोजकों ने शंकराचार्य को भारतीय कृषि संस्कृति के प्रतीक स्वरूप हल भेंट कर सम्मानित किया।

पालकी यात्रा में पुष्पवर्षा, प्रेमनिधि मंदिर में हुआ भव्य स्वागत

धर्मसभा के उपरांत धाकरान चौराहे से नाई की मंडी स्थित प्राचीन श्री प्रेमनिधि जी मंदिर तक शंकराचार्य महाराज की पालकी यात्रा निकाली गई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया तथा जयघोषों से वातावरण भक्तिमय बना दिया।

मंदिर पहुंचकर उन्होंने ठाकुर श्री श्याम बिहारी जी महाराज के दर्शन एवं पूजन किए तथा श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया। मंदिर परिसर में मुख्य सेवा अधिकारी हरिमोहन गोस्वामी, सुनीत गोस्वामी, दिनेश पचौरी, सुरेश पचौरी, आशीष बल्लभ पचौरी, रानू, नरेश, आदित्य, आयुष, अपूर्व शर्मा, मनीष धाकड़, नवीन शर्मा, मदन मोहन शर्मा, हैप्पी शिवहरे और सागर सहित अनेक श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया।

आगरा मंडल संयोजक आशीष बल्लभ पचौरी ने बताया कि "अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ" के मूल मंत्र के साथ संचालित यह 81 दिवसीय यात्रा देशभर में गौरक्षा के प्रति जनचेतना जागृत कर रही है।

किरावली में गौशाला निर्माण का लिया संकल्प

किरावली की धर्मसभा में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज।

वहीं किरावली स्थित मौनी बाबा आश्रम में भी शंकराचार्य के दर्शन के लिए चिलचिलाती धूप के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित रहे। उनके आगमन पर किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मुकेश डागुर ने पादुका पूजन कर विधिवत आरती उतारी तथा फल, फूल एवं वस्त्र भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामनाथ सिकरवार भी उपस्थित रहे। सुरेंद्र चौधरी ने उन्हें स्मृति चित्र भेंट किया।

अपने संबोधन में शंकराचार्य ने गाय की हत्या पर गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारों को गाय को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हुए राष्ट्रमाता घोषित करना चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को गौरक्षा का संकल्प दिलाया तथा प्रत्येक व्यक्ति से "एक नोट गाय के नाम" देने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने गोहत्या और गोमांस कारोबार से जुड़े लोगों के सामाजिक बहिष्कार की बात भी कही।

कार्यक्रम में धर्मेंद्र भारद्वाज, सुरेंद्र शर्मा, बंटी पंडित, सोमेंद्र लवानिया, सत्यवीर शर्मा, मुकेश सिकरवार, नरेश सिकरवार, जीतू ठाकुर, रविंद्र सिकरवार, लाला इन्दौलिया, पवन शर्मा, जगन्नाथ लवानिया, अभिषेक शर्मा, बिन्नू पंडित, राधेश्याम भगत, राजेंद्र शर्मा, रूप सिंह भगत, मनोज पंडित, प्रताप इन्दौलिया, छीतर सिंह इन्दौलिया, रामवीर इन्दौलिया, राजू सारस्वत, बिरजू सोलंकी, हरेंद्र सोलंकी, फोरन सिंह इन्दौलिया, निरंजन इन्दौलिया सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor