ताजमहल पर प्रदूषण के लिए जब 80% धूल और 84.5% वाहन जिम्मेदार, तो निशाने पर कौन और क्यों?

आगरा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अधिवक्ता एवं पर्यावरण मित्र के. सी. जैन ने ताजमहल और अन्य विश्व धरोहरों की सुरक्षा से जुड़े प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि यदि वैज्ञानिक अध्ययन स्पष्ट रूप से बता रहे हैं कि आगरा में वायु प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोत सड़क की धूल और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन हैं, तो प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति का केंद्र भी इन्हीं स्रोतों पर होना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्रदूषण नियंत्रण की नीतियां भावनाओं या धारणाओं पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तथ्यों और शोध रिपोर्टों पर आधारित हों।

Jun 6, 2026 - 11:41
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ताजमहल पर प्रदूषण के लिए जब 80% धूल और 84.5% वाहन जिम्मेदार, तो निशाने पर कौन और क्यों?

ताजमहल की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी

के. सी. जैन ने कहा कि ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसी विश्व धरोहरों की सुरक्षा हर नागरिक और सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन किसी भी नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह वास्तविक तथ्यों और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर बनाई गई है या नहीं। विश्व पर्यावरण दिवस आत्ममंथन का अवसर है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और उन स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए जिनका योगदान सबसे अधिक है।

IIT कानपुर की रिपोर्ट ने खोली प्रदूषण की असली तस्वीर

केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर द्वारा तैयार की गई स्रोत-विभाजन (सोर्स अपॉर्शनमेंट) रिपोर्टों का हवाला देते हुए जैन ने कहा कि आगरा में प्रदूषण के प्रमुख कारणों को लेकर उपलब्ध वैज्ञानिक आंकड़े बेहद महत्वपूर्ण हैं।

जून 2021 की रिपोर्ट के अनुसार PM2.5 प्रदूषण में सड़क की धूल का योगदान 63 प्रतिशत पाया गया, जबकि उद्योगों और वाहनों का योगदान 11-11 प्रतिशत दर्ज किया गया।

वहीं PM10 प्रदूषण के मामले में सड़क एवं मिट्टी की धूल का योगदान 79.80 प्रतिशत पाया गया। इसके मुकाबले उद्योगों की हिस्सेदारी केवल 4.53 प्रतिशत और वाहनों की 4.94 प्रतिशत रही।

NOx प्रदूषण के आंकड़े और भी चौंकाने वाले हैं। रिपोर्ट के अनुसार इसमें वाहनों का योगदान 84.5 प्रतिशत है, जबकि उद्योगों की हिस्सेदारी मात्र 4.7 प्रतिशत दर्ज की गई है।

के. सी. जैन का कहना है कि ये आंकड़े स्पष्ट संकेत देते हैं कि आगरा की वायु गुणवत्ता को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले कारक सड़क की धूल और भारी यातायात हैं।

राष्ट्रीय राजमार्ग-19 बना प्रदूषण का बड़ा स्रोत

जैन ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग-19 देश के सबसे व्यस्त राजमार्गों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों भारी वाहन केवल एक राज्य से दूसरे राज्य जाने के लिए आगरा क्षेत्र से गुजरते हैं। इनमें से अधिकांश वाहनों का आगरा शहर से कोई सीधा संबंध नहीं होता, लेकिन उनका प्रभाव स्थानीय प्रदूषण, यातायात दबाव और सड़क धूल के रूप में सामने आता है।

उन्होंने कहा कि आगरा उत्तरी बाईपास (नॉर्दर्न बाईपास) का निर्माण भी इसी उद्देश्य से किया गया था कि बाहरी और पारगमन यातायात को शहर से दूर रखा जा सके। यदि भारी वाहनों को प्रभावी ढंग से बाईपास मार्ग पर स्थानांतरित किया जाए तो प्रदूषण, जाम और सड़क धूल की समस्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

सड़क धूल नियंत्रण को मिले सर्वोच्च प्राथमिकता

के. सी. जैन ने कहा कि जब PM10 प्रदूषण का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा सड़क और मिट्टी की धूल से उत्पन्न हो रहा है, तो धूल नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाना समय की मांग है।

उन्होंने सुझाव दिया कि यांत्रिक सड़क सफाई, वैक्यूम स्वीपिंग मशीनों की नियमित तैनाती, सड़क किनारों का पक्कीकरण, हरित पट्टियों का विकास, निर्माण स्थलों पर सख्त धूल नियंत्रण और जाम वाले क्षेत्रों में यातायात पुनर्गठन जैसे उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

सरकार से वैज्ञानिक आधार पर नीति बनाने की मांग

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर के. सी. जैन ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की कि IIT कानपुर की रिपोर्टों का गंभीरता से अध्ययन कर प्रदूषण नियंत्रण की रणनीति को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया जाए। उनका कहना है कि ताजमहल की सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। यदि नीतियां वास्तविक तथ्यों पर आधारित हों तो दोनों उद्देश्यों को एक साथ प्राप्त किया जा सकता है।

श्री जैन ने कहा, विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह सोचने का अवसर देता है कि क्या हम प्रदूषण के उन कारणों पर पर्याप्त ध्यान दे रहे हैं जिनका योगदान सबसे अधिक है। यदि सड़क की धूल और यातायात प्रमुख स्रोत हैं तो संसाधनों और प्रयासों का बड़ा हिस्सा भी उन्हीं पर केंद्रित होना चाहिए। ताजमहल की सुरक्षा हमारा राष्ट्रीय दायित्व है और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सकता है।

एक नजर में प्रमुख तथ्य

-PM2.5 प्रदूषण में सड़क धूल का योगदान — 63%

-PM10 प्रदूषण में सड़क एवं मिट्टी की धूल का योगदान — 79.80%

-NOx प्रदूषण में वाहनों का योगदान — 84.5%

-PM10 में उद्योगों का योगदान — 4.53%

-NOx में उद्योगों का योगदान — 4.7%

-आगरा से गुजरने वाला पारगमन यातायात प्रदूषण बढ़ाने वाला प्रमुख कारक।

SP_Singh AURGURU Editor