चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर अखिलेश यादव के सवाल, योगी बोले- संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम न करे विपक्ष

लखनऊ। चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आमने-सामने नजर आए। अखिलेश यादव ने कथित चुनावी अनियमितताओं और वोटों की गड़बड़ी के आरोप दोहराते हुए चुनाव आयोग से अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने की मांग की, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईआर और ईवीएम को लेकर विपक्ष के सवालों पर पलटवार करते हुए संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ भ्रम पैदा न करने की बात कही। दोनों नेताओं के बयान ऐसे समय आए हैं, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।

Sep 27, 2026 - 23:19
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चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर अखिलेश यादव के सवाल, योगी बोले- संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम न करे विपक्ष

अखिलेश ने आयोग से विश्वसनीयता बनाए रखने को कहा

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं और वोटों की गड़बड़ी के आरोप दोहराते हुए कहा कि आयोग को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए। अखिलेश के मुताबिक, समाजवादी पार्टी के नेताओं ने पहले भी चुनाव से जुड़ी शिकायतें आयोग के सामने रखी हैं।

अखिलेश ने विपक्षी दलों की प्रस्तावित बैठक का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 30 सितंबर को होने वाली बैठक में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्षी दलों के बीच चर्चा को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।

योगी ने एसआईआर को लेकर विपक्ष पर पलटवार किया

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसआईआर को लेकर कांग्रेस और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने और उन्हें बदनाम करने का आरोप लगाया।

योगी ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ भ्रम पैदा नहीं किया जाना चाहिए। एसआईआर और ईवीएम को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर लोगों में भ्रम फैलाने से बचना चाहिए।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ के बयानों से स्पष्ट है कि चुनाव आयोग, मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रमुख बहस का विषय बने हुए हैं। एक ओर सपा चुनावी अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर आयोग से जवाबदेही और विश्वसनीयता की बात कर रही है, वहीं भाजपा सरकार विपक्ष के आरोपों को संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के रूप में देख रही है। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच दोनों पक्षों के ये रुख आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रहने की संभावना है।

SP_Singh AURGURU Editor