विवादों के बीच चुना आयोग की बड़ी बैठक,  मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त हुए शामिल, लिए कई फैसले

चुनाव आयोग की बैठक में तीनों चुनाव आयुक्तों ने संयुक्त रूप से कई फैसलों को अंतिम रूप दिया। इसके बाद आयोग ने यह भी कहा कि फॉर्म 6 को लेकर जो विवाद है, असल में वह कोई मुख्य मुद्दा है हीं नहीं।  

Sep 26, 2026 - 18:34
Sep 26, 2026 - 18:40
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विवादों के बीच चुना आयोग की बड़ी बैठक,  मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्त हुए शामिल, लिए कई फैसले


 
नई दिल्ली। देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी तमाम विवादों के बीच चुनाव आयोग ने शनिवार (26 सितंबर, 2026) को बड़ी बैठक की है। इस अहम बैठक में आयोग के तीनों चुनाव आयुक्त यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी शामिल रहे। इस बैठक में तय किया गया कि फॉर्म 6 को लेकर जो विवाद है, असल में वह कोई मुख्य मुद्दा है हीं नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने भी फॉर्म-6 के डिक्लेरेशन को सही माना है।

आयोग की तरफ से यह भी बताया गया कि कैबिनेट सेक्रेटरी को जो चिट्ठी लिखी गई थी, उसका चुनाव आयोग के पॉलिसी डिसीजन से कोई लेना-देना नहीं था।

चुनाव आयोग की तरफ से शनिवार (26 सितंबर, 2026) को जारी किए गए आधिकारिक बयान के मुताबिक, बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ अन्य दोनों चुनाव आयुक्तों ने आम सहमति के साथ कई फैसले किए हैं। इस फैसले में कहा गयाः-

एसआईआ में नोटिस पाए लोगों के घर बीएलओ दस्तावेज लेने जाएंगे। सुनवाई आम तौर पर जरूरी नहीं होगी।
डीईओ जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघरों के लिए हेल्प डेस्क लगाएंगे।
एसआईआर में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट से बरकरार रही है।
ईसीआई की समीक्षा वरिष्ठ डीईसी और स्वतंत्र विशेषज्ञ की समिति करेगी।
दिल्ली में दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर हुई।
आयोग की सभी बैठकों में एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही जारी होगी।
सभी अधिकारियों की एपीएआर रिपोर्ट हर साल निर्धारित समय 31 दिसंबर तक पूरी होगी।
अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए अब चुनाव आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी।
आयुक्तों की तरफ से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

दूसरे फैसले में कहा गया, ‘एसआईआर की प्रक्रिया बिहार और पश्चिम बंगाल समेत देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले ही पूरा हो चुका है। अगर एसआईआर के दौरान या उसके बाद वोटर लिस्ट में जिन लोगों का नाम छूट गया है, इसके साथ युवा या पहली बार वोट देने वाले लोग भी, अपने नाम को वोटर लिस्ट में शामिल कराने के लिए निरंतर अपडेटेशन के तहत संबंधित ईआरओ के पास आवेदन दे सकते हैं।’  

आयोग ने कहा, ‘मुख्य चुनाव अधिकारियों को इस प्रक्रिया के लिए सुविधा देने के निर्देश दिए गए हैं। एसआईआर पूरा होने के बाद छूटे हुए और नए वोटरों के नाम जुड़वाने के लिए तुरंत विशेष अभियान शुरू किया जाएगा।

तीसरे फैसले में कहा गया कि कैबिनेट सचिव को पत्र आईटी नीति नहीं, प्रतिनियुक्त अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
देशव्यापी एसआईआर से संबंधित आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।
गोवा में बीएलओ घर-घर जाकर छूटे मतदाताओं से फॉर्म-6 भरवा रहे हैं।
इसके बाद, आयोग ने अपने आधिकारिक बयान के आखिर में कहा कि यह प्रेस विज्ञप्ति 26 सितंबर की आयोग की बैठक के लिए गए फैसलों और आयोग की पूर्ण मंजूरी से जारी किया गया है।