कंगना रनौत केस में आगरा की अदालत में दोनों पक्षों ने की बहस, अब 4 अगस्त को आएगा आदेश

आगरा। भाजपा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ दर्ज कथित राजद्रोह और किसानों के अपमान से जुड़े मामले में मंगलवार को अदालत में दोनों पक्षों के बीच करीब एक घंटे तक तीखी और विस्तृत बहस हुई। कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा, जबकि वादी रमाशंकर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अदालत में दलीलें पेश कीं। दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने आदेश सुरक्षित रखते हुए 4 अगस्त 2026 की तारीख निर्धारित की है।

Jul 21, 2026 - 20:40
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कंगना रनौत केस में आगरा की अदालत में दोनों पक्षों ने की बहस, अब 4 अगस्त को आएगा आदेश

मामला हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत के विरुद्ध दर्ज शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन पर कथित रूप से राजद्रोह तथा किसानों के अपमान से संबंधित आरोप लगाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान कंगना रनौत की ओर से सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनसूया चौधरी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। वहीं वादी रमाशंकर शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुखबीर सिंह चौहान, राजवीर सिंह, बी. एस. फौजदार सहित अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत में बहस करते हुए पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

वादी पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई जांच आख्या अधूरी है। अधिवक्ताओं ने कहा कि पुलिस ने विपक्षी कंगना रनौत का स्वयं बयान दर्ज किए बिना उनकी अधिवक्ता का बयान लेकर जांच रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत कर दी, जो विधिसम्मत नहीं मानी जा सकती।

वादी पक्ष ने अदालत से आग्रह किया कि अधूरी जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले का निस्तारण नहीं किया जा सकता। इसलिए न्यायालय को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 225(1) के तहत स्वयं विपक्षी को तलब कर उनका बयान दर्ज करना चाहिए।

वादी रमाशंकर शर्मा ने अदालत के समक्ष यह भी कहा कि 6 मई 2025 को निचली अदालत द्वारा परिवाद खारिज किए जाने के बाद पुनरीक्षण (रिवीजन) न्यायालय ने 11 सितंबर 2025 के अपने आदेश में स्पष्ट टिप्पणी की थी कि निचली अदालत ने पुलिस की अधूरी जांच रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए परिवाद खारिज किया था। इसी आधार पर पुनरीक्षण न्यायालय ने परिवाद स्वीकार करते हुए मामले में पुनः सुनवाई कर विधिसम्मत आदेश पारित करने के निर्देश दिए थे।

दोनों पक्षों की विस्तृत बहस सुनने के बाद अदालत ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और 4 अगस्त 2026 को आदेश सुनाने की तिथि निर्धारित कर दी।

अब इस मामले में न्यायालय के आगामी आदेश पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि आदेश के बाद मामले की आगे की कानूनी दिशा तय होगी।

SP_Singh AURGURU Editor