पालीवाल पार्क में 75 लाख से विकसित चिल्ड्रेन पार्क उद्घाटन का इंतजार कर रहा, बच्चे रेलिंग फांदकर झूलों तक पहुंचने को मजबूर, प्रशासन से जवाब मांग रहे अभिभावक- बाल उद्यान कब खुलेगा?
आगरा। शहर के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक हरित क्षेत्र पालीवाल पार्क में बच्चों के लिए लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया आधुनिक बाल उद्यान अब प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। लगभग 62 एकड़ क्षेत्रफल में फैले पालीवाल पार्क में बच्चों के मनोरंजन और खेलकूद के लिए विकसित चिल्ड्रेन पार्क पर करीब 75 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बावजूद यह सुविधा आज तक आम जनता के लिए नहीं खोली गई है। इस स्थिति पर पर्यावरण प्रेमी, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. जैन ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बाल उद्यान को तत्काल खोलने की मांग उठाई है।
आगरा। शहर के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक हरित क्षेत्र पालीवाल पार्क में बच्चों के लिए लाखों रुपये की लागत से तैयार किया गया आधुनिक बाल उद्यान अब प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बनता जा रहा है। लगभग 62 एकड़ क्षेत्रफल में फैले पालीवाल पार्क में बच्चों के मनोरंजन और खेलकूद के लिए विकसित चिल्ड्रेन पार्क पर करीब 75 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य लगभग पूरा होने के बावजूद यह सुविधा आज तक आम जनता के लिए नहीं खोली गई है। इस स्थिति पर पर्यावरण प्रेमी, अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. जैन ने कड़ी नाराजगी जताते हुए बाल उद्यान को तत्काल खोलने की मांग उठाई है।
एडवोकेट के.सी. जैन ने बताया कि पालीवाल पार्क में आधुनिक झूले, सी-सॉ और अन्य खेल उपकरणों से युक्त बाल उद्यान विकसित करने की मांग लंबे समय से शहरवासियों द्वारा उठाई जा रही थी। तत्कालीन मंडलायुक्त ऋतु माहेश्वरी की अध्यक्षता में आयोजित जिला उद्यान समिति की बैठक में इस मांग को स्वीकार करते हुए लगभग 75 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। इसके बाद कार्यदायी संस्था द्वारा आधुनिक खेल उपकरणों की स्थापना का कार्य भी लगभग पूरा कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये के सार्वजनिक विकास कार्यों की तरह यह परियोजना भी फाइलों और औपचारिकताओं में उलझी हुई दिखाई दे रही है। उद्यान विभाग का तर्क है कि बाल उद्यान के एक कोने में स्थित जर्जर भवन को ध्वस्त किए बिना पार्क नहीं खोला जा सकता और इसके लिए मामला निदेशालय स्तर पर लंबित है। सवाल यह है कि बच्चों की सुविधा से जुड़ा मामला आखिर कब तक सरकारी प्रक्रियाओं में फंसा रहेगा।
ताले में बंद पार्क, रेलिंग फांदकर खेल रहे बच्चे
मंगलवार को किए गए निरीक्षण के दौरान के.सी. जैन ने पाया कि बाल उद्यान का मुख्य द्वार ताले से बंद था, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे अपने अभिभावकों के साथ पार्क के भीतर खेल रहे थे। बाहर निकलते समय बच्चों और अभिभावकों को लोहे की जाली, रेलिंग और बंद गेट पार कर बाहर आना पड़ रहा था।
उन्होंने कहा कि यह दृश्य प्रशासनिक विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यदि पार्क वास्तव में असुरक्षित है तो बच्चों का भीतर प्रवेश कैसे हो रहा है, और यदि बच्चे पहले से वहां खेल रहे हैं तो उसे नियमित रूप से जनता के लिए खोलने में आखिर बाधा क्या है?
बच्चों के पार्क के बाहर कूड़े के ढेर
निरीक्षण के दौरान बाल उद्यान के बाहर बड़ी मात्रा में कूड़ा-कचरा, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट सामग्री भी पाई गई। बच्चों के लिए विकसित किए गए इस क्षेत्र के आसपास फैली गंदगी को लेकर भी जैन ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक ओर लाखों रुपये खर्च कर आधुनिक पार्क तैयार किया गया है, दूसरी ओर उसके बाहर गंदगी के ढेर प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहे हैं।
उन्होंने नगर निगम से तत्काल सफाई अभियान चलाकर कूड़ा हटाने, नियमित स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा क्षतिग्रस्त फुटपाथ की मरम्मत कराने की मांग की।
वर्षों से अधूरी पड़ी जनसुविधाएं
पार्क परिसर में प्रस्तावित कई जनसुविधाओं का निर्माण कार्य भी लंबे समय से अधूरा पड़ा हुआ है। आम नागरिकों को यह तक जानकारी नहीं है कि इन सुविधाओं को पूरा करने की कोई समयसीमा तय की गई है या नहीं। इससे जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रशासन से उठीं प्रमुख मांगें
उन्होंने मांग की कि बाल उद्यान को तत्काल जनता के लिए खोला जाए। यदि जर्जर भवन को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता है तो उस हिस्से को अस्थायी रूप से घेरकर शेष पार्क को शुरू किया जाए। इसके साथ ही कूड़ा-कचरा हटाने, अधूरी जनसुविधाएं पूर्ण करने, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती तथा लंबित फाइलों के शीघ्र निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
जब बच्चे ताला पार कर खेलें, तो दोष व्यवस्था का
अधिवक्ता एवं सामाजिक कार्यकर्ता के.सी. जैन ने कहा कि बच्चों की गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं और सार्वजनिक धन से निर्मित यह सुविधा बच्चों के उपयोग के लिए बनाई गई है, न कि वर्षों तक ताले में बंद रखने के लिए। उन्होंने कहा कि जब बच्चे रेलिंग और बंद गेट पार कर खेलने को मजबूर हों, तब समस्या बच्चों की नहीं बल्कि व्यवस्था की होती है। प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप कर बाल उद्यान को जनता को समर्पित करना चाहिए ताकि हजारों बच्चे सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण में खेल सकें।