भारत-फिलीपींस व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य, निवेश और संयुक्त उत्पादन बने साझेदारी का नया आधार: पूरन डावर
मनीला/आगरा। भारत और फिलीपींस के बीच आर्थिक संबंधों को केवल व्यापार तक सीमित रखने के बजाय निवेश, संयुक्त विनिर्माण, तकनीकी सहयोग और एकीकृत सप्लाई चेन तक ले जाने की जरूरत है। फिक्की के वरिष्ठ सदस्य एवं डावर फुटवियर इंडस्ट्रीज के चेयरमैन पूरन चंद डावर ने मनीला में आयोजित आसियान-भारत बिजनेस फोरम 2026 में भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने पर जोर दिया। उन्होंने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखने और इसके लिए ठोस कारोबारी साझेदारियां विकसित करने का आह्वान किया।

फोरम के मंच पर मौजूद भारतीय प्रतिनिधिमंडल और फिलीपींस के प्रतिनिधि।
फोरम में मंत्रियों, राजनयिकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए डावर ने कहा कि भारत और फिलीपींस स्वाभाविक साझेदार हैं। दोनों जीवंत लोकतंत्र हैं, दोनों के पास युवा एवं उद्यमशील समाज हैं और दोनों तेजी से बढ़ते बाजार हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के नेतृत्व में दोनों देशों के संबंध रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंच चुके हैं। अब उद्योग और व्यापार जगत की जिम्मेदारी है कि इस साझेदारी को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग चार अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच रहा है, लेकिन दोनों देशों की वास्तविक क्षमता को देखते हुए यह अभी काफी कम है। वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। इसके लिए केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निवेश, संयुक्त विनिर्माण, तकनीकी सहयोग और एकीकृत सप्लाई चेन विकसित करने की दिशा में भी ठोस प्रयास करने होंगे।
आर्थिक साझेदारी मजबूत करने के पांच सुझाव
पूरन चंद डावर ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाने के लिए पांच प्रमुख सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट को गति देते हुए अधिक संभावनाओं वाले उत्पादों के लिए शीघ्र अर्ली हार्वेस्ट पैकेज तैयार किया जाना चाहिए। इसके साथ ही तेज कस्टम क्लीयरेंस, मानकों की पारस्परिक मान्यता और सरल पंजीकरण प्रक्रिया के माध्यम से व्यापार में आने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को कम करना जरूरी है।
उन्होंने फार्मास्यूटिकल्स एवं स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), फिनटेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, अक्षय ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा उत्पादन, ऑटोमोबाइल, फुटवियर और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में विशेष साझेदारी विकसित करने पर जोर दिया।
डावर ने कहा कि दोनों देशों के एमएसएमई, स्टार्टअप्स, खरीदारों और रिटेलर्स को सीधे जोड़ने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्हें विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार, बाजार से जुड़ी जानकारी और ट्रेड फाइनेंस की सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के बाद संभावित परियोजनाओं की पहचान की जाए। उनके लिए जिम्मेदार साझेदार तय हों और निर्धारित समय-सीमा के साथ स्पष्ट बिजनेस पाइपलाइन तैयार की जाए, ताकि बैठकों और चर्चाओं के ठोस व्यावसायिक परिणाम सामने आ सकें।
भारत-फिलीपींस मिलकर पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए कर सकते हैं उत्पादन
डावर ने कहा कि भारत के पास विशाल बाजार, किफायती तकनीक, कुशल प्रतिभा और मजबूत विनिर्माण क्षमता है। वहीं फिलीपींस के पास तेजी से बढ़ता उपभोक्ता बाजार, अंग्रेजी भाषी प्रतिभा और आसियान देशों तक रणनीतिक पहुंच है। इन क्षमताओं का लाभ उठाकर दोनों देश न केवल अपने घरेलू बाजारों, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए संयुक्त रूप से उत्पादन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में दोनों देशों के पास अपनी औद्योगिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
बदलती विश्व व्यवस्था में श्रम-प्रधान उद्योगों की बढ़ेगी भूमिका
अपने संबोधन में व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए पूरन चंद डावर ने कहा, “इसे विडम्बना कहें, नियति कहें या बदलती विश्व व्यवस्था का संकेत—मैन्युफैक्चरिंग वैल्यू चेन के सबसे जमीनी और श्रम-प्रधान क्षेत्र का प्रतिनिधि आज भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहा है। हम बदलती विश्व व्यवस्था की चर्चा कर रहे हैं; उसी के साथ एक नई मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्था भी आकार ले रही है। श्रम-प्रधान उद्योग अब वैश्विक विकास, रोजगार और सप्लाई चेन के केन्द्र में आ रहे हैं।”
उन्होंने अपने मूल क्षेत्र फुटवियर उद्योग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस उद्योग को कभी केवल कारीगरों का उद्योग समझा जाता था, आज उसका वैश्विक कारोबार लगभग 450 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। भारत का फुटवियर एवं लेदर क्षेत्र लगभग 26 अरब डॉलर का है और वर्ष 2030 तक इसे 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
उन्होंने कहा कि भारत और फिलीपींस दोनों देशों के पास विशाल युवा मानव संसाधन है। ऐसे में श्रम-प्रधान विनिर्माण के क्षेत्र में दोनों देश दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल कर सकते हैं। इसके लिए उत्पादन क्षमता, तकनीक, कौशल विकास और वैश्विक बाजारों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना आवश्यक है।
व्यापार से आगे बढ़कर ठोस परिणामों की साझेदारी बनाने का आह्वान
अपने संबोधन के अंत में पूरन चंद डावर ने कहा, “भारत-फिलीपींस संबंधों का अगला अध्याय केवल सरकारें नहीं लिखेंगी; इसे हमारे उद्योग, उद्यमी, एमएसएमई और युवा मिलकर बनाएंगे। अब हमें व्यापार से साझेदारी, सप्लाई से सह-उत्पादन और अवसरों से मापनीय परिणामों की ओर बढ़ना होगा।”
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दोनों देशों के उद्योगों के बीच मजबूत सहयोग से निवेश, रोजगार, तकनीकी विकास और नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत-फिलीपींस आर्थिक संबंधों को नई दिशा मिलेगी।