डीईआई में अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का ज्ञानवर्धक विमर्श के साथ समापन, जर्मनी, अमेरिका, कनाडा समेत विभिन्न देशों से जुटे विशेषज्ञों ने ‘TEASE’ पर किया संवाद, वैज्ञानिक और शोधकर्ता सम्मानित
आगरा। दयालबाग शिक्षण संस्थान में कला, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (इवोल्यूशनरी/री-इवोल्यूशनरी) चेतना (डीएससी) पर आयोजित 8वें अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी तथा 49वें राष्ट्रीय सिस्टम सम्मेलन (एनएससी) का 23 सितंबर को ज्ञानवर्धक विचार-विमर्श, प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ समापन हुआ। अंतिम दिन सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया (एसएसआई) की वार्षिक आम सभा से लेकर देश-विदेश के वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को सम्मानित करने वाले पुरस्कार समारोह और ‘टीज (टुवर्ड्स इवोल्यूशनरी/री-इवोल्यूशनरी आर्ट, साइंस एंड इंजीनियरिंग ऑफ कॉन्शसनेस)’ विषय पर संवादात्मक पैनल चर्चा तक कई महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुए।

संगोष्ठी में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले बच्चे।
संगोष्ठी में दिन की शुरुआत सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया की वार्षिक आम सभा की बैठक से हुई। इसके बाद आयोजित पुरस्कार समारोह में एसएसआई के चयनित सदस्यों को उनके पेशेवर और शोध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार एसएसआई के अध्यक्ष एवं डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने प्रदान किए।
जर्मनी के कील विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित गणितज्ञ एवं कंप्यूटर वैज्ञानिक प्रो. आनंद श्रीवास्तव तथा भारत के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्टों में से एक डॉ. वी. नटराजन को समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड’ प्रदान किया गया। आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा को प्रतिष्ठित ‘नेशनल सिस्टम्स गोल्ड मेडल’ प्रदान किया गया।
‘द सिस्टम्स सोसाइटी राजकुमार वार्ष्णेय अवॉर्ड’ आईसीएआर-आईआईएमआर की डॉ. सी. तारा सत्यवती को, ‘एसएसआई विक्रम अवॉर्ड’ यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो की डॉ. आशिता अल्लमरजू को तथा ‘यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड’ कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, यूएसए के डॉ. अनुभव नानावती को प्रदान किया गया।
डीएससी और एनएससी में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र (बेस्ट पेपर) और पोस्टर प्रस्तुति के पुरस्कार शामिल रहे। ये पुरस्कार प्रो. पम्मी दुआ और प्रो. आनंद श्रीवास्तव ने प्रदान किए।
डीएससी बेस्ट पेपर के लिए सुश्री स्वाति इदानी और उनके सह-लेखकों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। डीएससी बेस्ट पोस्टर का पुरस्कार प्रो. आनंद मोहन, कनिका कौश्था, हंस मोहन और नगमा मार्कन को दिया गया। स्कूल स्टूडेंट्स श्रेणी में डीएससी के विशेष सत्र के दौरान दयाल अनुपमा न्यारी, अनमोल बंदगी सत्संगी और सुमेरा कुमार ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त किया।
एनएससी के विभिन्न ट्रैक्स में बेस्ट पेपर अवॉर्ड भी प्रदान किए गए। ट्रैक-1 में शब्द साहनी, सुरत साहनी और डॉ. ए. चरण कुमारी को सम्मानित किया गया। ट्रैक-2 में निधि त्यागी, डॉ. श्रीकांत साहू, डॉ. सुधीर कुमार वर्मा, डॉ. सचिन सक्सेना, डॉ. आशीष कुमार सतपती, गुरचरण मार्चंडा और डॉ. अमला चोपड़ा को पुरस्कार मिला। ट्रैक-3 में झनकार नैय्यर और डॉ. दयाल प्यारी श्रीवास्तव को बेस्ट पेपर अवॉर्ड प्रदान किया गया।
एनएससी की जूनियर कैटेगरी बेस्ट पोस्टर अवॉर्ड से सिमरन मेहता, दृष्टि मेहता, श्रद्धा प्रियदर्शी, सुधि सारण, सारंग माथुर और धुन सत्संगी को सम्मानित किया गया। सीनियर कैटेगरी में बेस्ट पोस्टर का पुरस्कार प्रेम सखी, पूर्णिमा भटनागर और प्रो. पम्मी दुआ को प्रदान किया गया।
चेतना के विकास पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
पुरस्कार समारोह के बाद ‘टीज (टुवर्ड्स इवोल्यूशनरी/री-इवोल्यूशनरी आर्ट, साइंस एंड इंजीनियरिंग ऑफ कॉन्शसनेस)’ विषय पर संवादात्मक पैनल चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने चेतना के विकास, कला, विज्ञान और इंजीनियरिंग के परस्पर संबंधों से जुड़े विषयों पर अपने विचार साझा किए।
पैनल में श्री गुर स्वरूप सूद, अध्यक्ष, राधा स्वामी सत्संग सभा, दयालबाग एवं डीईआई; प्रो. वी.बी. गुप्ता, कोऑर्डिनेटर, ओपन डिस्टेंस लर्निंग, डीईआई; प्रो. आनंद श्रीवास्तव, एमेरिटस प्रोफेसर, फ्रैंकफर्ट विश्वविद्यालय, जर्मनी एवं डीएससी 2026 के आयोजक; प्रो. पम्मी दुआ, फॉर्मर डायरेक्टर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एवं सदस्य, प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद; प्रो. सरूप रानी माथुर, एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए; प्रो. एंड्रियास नेहरिंग, यूनिवर्सिटी ऑफ एर्लांगेन-नूर्नबर्ग, जर्मनी; प्रो. हुज़ूर सरन, आईआईटी दिल्ली; प्रो. पी.के. कालरा, पूर्व प्रोफेसर, आईआईटी दिल्ली; डॉ. अपूर्व नारायण, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो, कनाडा; प्रो. सी. पटवर्धन, निदेशक, डीईआई; प्रो. संजीव स्वामी, रजिस्ट्रार, डीईआई तथा श्रीमती स्नेह बिजलानी, कोषाध्यक्ष, डीईआई शामिल रहे। प्रो. संजय भूषण ने पैनल चर्चा का कुशलतापूर्वक संचालन किया।
डीएससी-एनएससी 2027 के आयोजन पर बनी सहमति
प्री-लंच सत्र में डीएससी एवं एनएससी 2027 के आयोजन के लिए कंसेंसस-बिल्डिंग मीटिंग आयोजित हुई। इसकी अध्यक्षता डीईआई के निदेशक प्रो. सी. पटवर्धन ने की।
ओडिसी, सूफी नृत्य और राग यमन ने बांधा समां
सम्मेलन के समापन अवसर पर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने वाला जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। डीईआई के विद्यार्थियों तथा दयालबाग संत सुपरह्यूमन इवोल्यूशनरी स्कीम के बच्चों ने विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
संत सुपरह्यूमन इवोल्यूशनरी स्कीम के बच्चों ने दो मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। पहली प्रस्तुति जयदेव के अष्टपदी के हिंदी अनुवाद पर आधारित ओडिसी शास्त्रीय नृत्य की रही, जबकि दूसरी प्रस्तुति सूफी परंपरा की जीवंत लय पर आधारित ऊर्जावान नृत्य की थी।
इसके बाद डीईआई के विद्यार्थियों ने ‘सुर-ताल-त्रिवेणी’ प्रस्तुत की। इसमें राग यमन की मधुर एवं आत्मीय प्रस्तुति के साथ भावपूर्ण गायन, सितार और तबले की संगत ने वातावरण को सुरमय बना दिया।
अंतिम दिन के समापन पर प्रो. के. स्वामी दया ने धन्यवाद ज्ञापन (वोट ऑफ थैंक्स) प्रस्तुत किया। इसके बाद संस्थान गीत हुआ और विदाई भोज (फेयरवेल लंच) के साथ 8वें अंतरराष्ट्रीय डीएससी तथा 49वें राष्ट्रीय सिस्टम सम्मेलन का विधिवत समापन हुआ।