सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद कीठम झील को बड़ी जीत, सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल हुआ 800 हेक्टेयर, आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद 14.5 हेक्टेयर भूमि भी पक्षी विहार में शामिल, जीरो ईको सेंसिटिव जोन भी वापस लिया गया, ये भी अब नए सिरे से तय होगा

आगरा। सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आगरा के प्रमुख पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता को सूर सरोवर पक्षी विहार (कीठम झील) के संरक्षण की दिशा में बड़ी कामयाबी मिली है। उत्तर प्रदेश वन विभाग ने सिंचाई विभाग की 14.5 हेक्टेयर लंबित भूमि को भी सूर सरोवर पक्षी विहार का हिस्सा घोषित करने का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके साथ ही तीन चरणों में जारी अधिसूचनाओं के बाद पक्षी विहार का कुल अधिसूचित क्षेत्रफल लगभग 800 हेक्टेयर हो गया है। अब इसके आसपास नए सिरे से ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित किया जाना बाकी है।

Sep 23, 2026 - 21:20
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सात साल की कानूनी लड़ाई के बाद कीठम झील को बड़ी जीत, सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल हुआ 800 हेक्टेयर, आगरा के पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद 14.5 हेक्टेयर भूमि भी पक्षी विहार में शामिल, जीरो ईको सेंसिटिव जोन भी वापस लिया गया, ये भी अब नए सिरे से तय होगा
सूर सरोवर पक्षी विहार की एक झलक।

डॊ. शरद गुप्ता, जिन्होंने सूर सरोवर पक्षी विहार के संरक्षण के लिए लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ी।

डॉ. शरद गुप्ता ने वर्ष 2019 में सूर सरोवर पक्षी विहार के क्षेत्र को संरक्षित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वर्ष 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल बढ़ाने का आदेश दिया। आदेश पर अमल नहीं होने पर डॉ. गुप्ता ने वर्ष 2023 में फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए आदेश का पालन नहीं होने की बात उठाई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) को सौंप दिया गया।

सीईसी के समक्ष उत्तर प्रदेश वन विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए लगातार समय मांगता रहा। अंततः वन विभाग ने दो चरणों में सूर सरोवर पक्षी विहार के क्षेत्रफल को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किए। इसके बाद भी 14.5 हेक्टेयर भूमि का मामला लंबित था।

सिंचाई विभाग से वन विभाग को हस्तांतरित हुई जमीन

यह 14.5 हेक्टेयर भूमि सिंचाई विभाग की थी। इसे वन विभाग को हस्तांतरित किया जाना था। शासन से अनुमति मिलने के बाद भूमि सिंचाई विभाग से जिलाधिकारी के पास आई। जिलाधिकारी, आगरा ने इसे वन विभाग को हस्तांतरित किया। इसके बाद वन विभाग ने 14.5 हेक्टेयर भूमि को सूर सरोवर पक्षी विहार का हिस्सा घोषित करने का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

इस तरह तीन चरणों में जारी गजट नोटिफिकेशन के बाद सूर सरोवर पक्षी विहार का कुल क्षेत्रफल लगभग 800 हेक्टेयर के रूप में अधिसूचित हो चुका है।

अब नए सिरे से तय होगा ईको सेंसिटिव जोन

डॉ. शरद गुप्ता के अनुसार, वन विभाग ने उनकी आपत्ति के बाद सूर सरोवर पक्षी विहार के लिए पहले तय किए गए जीरो ईको सेंसिटिव जोन के आदेश को भी वापस ले लिया है। अब पक्षी विहार के आसपास ईको सेंसिटिव जोन नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि किसी संरक्षित पक्षी विहार क्षेत्र के आसपास एक किलोमीटर से लेकर 10 किलोमीटर तक का क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन घोषित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने ईको सेंसिटिव जोन के लिए न्यूनतम एक किलोमीटर की परिधि को जरूरी बताया है। ऐसे में अब उत्तर प्रदेश वन विभाग को कीठम झील और सूर सरोवर पक्षी विहार के आसपास नए सिरे से ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित करना होगा।

व्यावसायिक गतिविधियों पर मंडरा सकता है कार्रवाई का खतरा

नया ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित होने के बाद उसके दायरे में आने वाली गतिविधियों पर नियमानुसार प्रतिबंध लागू होंगे। फिलहाल कीठम झील और सूर सरोवर पक्षी विहार के आसपास कई तरह की व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इनमें शिक्षण संस्थाओं के साथ उद्योग, ऑटोमोबाइल शोरूम और कंक्रीट मिक्सचर प्लांट शामिल हैं।

इसके अलावा बड़ी संख्या में खेतों में अनधिकृत तरीके से आवासीय कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। नया ईको सेंसिटिव जोन निर्धारित होने के बाद इन गतिविधियों पर कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है और नियमों के दायरे में आने वाली गतिविधियों पर सील लगाने तक की कार्रवाई का खतरा पैदा हो सकता है।

सूर सरोवर पक्षी विहार का क्षेत्रफल बढ़ाए जाने और अब 14.5 हेक्टेयर भूमि को भी इसमें शामिल किए जाने के बाद संरक्षण की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। अब निगाहें नए ईको सेंसिटिव जोन के निर्धारण पर टिकी हैं, जिसके बाद कीठम झील के आसपास होने वाली गतिविधियों को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

SP_Singh AURGURU Editor