डीईआई में चेतना, विज्ञान और विकास पर दुनिया भर के विद्वानों का मंथन, डीएससी-एनएससी संगोष्ठी मस्तिष्क, मन और आत्मा से लेकर पृथ्वी तंत्र और जलवायु परिवर्तन तक विषयों पर हुआ विचार-विमर्श

आगरा। दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), दयालबाग में चेतना, विज्ञान, प्रणालियों और विकास के विभिन्न आयामों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का मंथन शुरू हो गया। सोमवार को 8वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘दयालबाग (आर्ट) साइंस एंड इंजीनियरिंग ऑफ इवोल्यूशनरी/री-इवोल्यूशनरी कॉन्शसनेस’ (DSC) तथा 49वें (इंटर) नेशनल सिस्टम्स कॉन्फ्रेंस (NSC) का शुभारंभ हुआ। तीन दिवसीय आयोजन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान, शोधकर्ता और आमंत्रित वक्ता भौतिक एवं वर्चुअल माध्यम से भाग ले रहे हैं। आयोजन 21 से 23 सितंबर तक चलेगा।

Sep 21, 2026 - 21:49
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डीईआई में चेतना, विज्ञान और विकास पर दुनिया भर के विद्वानों का मंथन, डीएससी-एनएससी संगोष्ठी मस्तिष्क, मन और आत्मा से लेकर पृथ्वी तंत्र और जलवायु परिवर्तन तक विषयों पर हुआ विचार-विमर्श
डीईआई में आयोजित डीएससी-एनएससी संगोष्ठी में लेक्चर देते अतिथि वक्ता।

प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रार्थना और स्वागत संबोधनों से हुई। डीएससी के आयोजक एवं कील यूनिवर्सिटी, जर्मनी के प्रो. आनंद श्रीवास्तव, डीएससी की सह-अध्यक्ष (पश्चिम) एवं एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका की प्रो. सरूप रानी माथुर, डीएससी के सह-आयोजक तथा यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो एवं यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू, कनाडा के प्रो. अपूर्व नारायण, डीईआई के सह-आयोजक प्रो. संजय भूषण और डीईआई, दयालबाग के सह-आयोजक प्रो. के. स्वामी दया ने स्वागत एवं उद्घाटन संबोधन दिए।

मस्तिष्क से चेतना तक उठे ‘मैं’ और निर्णय के सवाल

उद्घाटन भाषण डीईआई के निदेशक एवं सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया के वर्तमान अध्यक्ष प्रो. सी. पटवर्धन ने दिया। सत्र की अध्यक्षता एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रो. सरूप रानी माथुर ने की। प्रो. पटवर्धन ने ‘मस्तिष्क, मन और आत्मा के अध्ययन के माध्यम से इंजीनियरिंग, विज्ञान और चेतना की कला को समझने की दिशा में: विभिन्न पहलुओं को एक साथ जोड़ना’ विषय पर चर्चा की।

उन्होंने मस्तिष्क में होने वाली भौतिक प्रक्रियाओं से व्यक्तिपरक अनुभवों के जन्म, ‘मैं’ के निर्माण और सचेत आत्म के अपने निर्णयों का वास्तविक कर्ता होने जैसे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में समग्र विज्ञान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ज्ञानमीमांसीय एकीकरण की आवश्यकता होगी।

इसके बाद बहुप्रतीक्षित ‘विज़न टॉक’ परम आदरणीय प्रो. प्रेम सरन सत्संगी साहब ने प्रस्तुत किया। वह दयालबाग एजुकेशनल संस्थानों की शिक्षा संबंधी सलाहकार समिति के अध्यक्ष हैं। यह समिति दयालबाग एजुकेशनल संस्थानों के लिए गैर-सांविधिक शीर्ष निकाय एवं विचार-मंच के रूप में कार्य करती है। प्रो. सत्संगी साहब दयालबाग के राधास्वामी मत के 8वें आध्यात्मिक गुरु भी हैं। सत्र की अध्यक्षता कील यूनिवर्सिटी के प्रो. आनंद श्रीवास्तव ने की। विज़न टॉक के दौरान प्रो. सत्संगी जी के पूर्व विज़न टॉक्स, प्रवचनों और वक्तव्यों से चेतना की प्रकृति तथा उसके अध्ययन से संबंधित चयनित अंश भी प्रस्तुत किए गए।

उद्घाटन सत्र में राधास्वामी सत्संग सभा और डीईआई के अध्यक्ष श्री गुरु स्वरूप सूद का संबोधन भी हुआ।

महिलाओं की भूमिका से लेकर जलवायु परिवर्तन तक चर्चा

डीएससी का मुख्य व्याख्यान दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व निदेशक प्रो. पम्मी दुआ ने दिया। उन्होंने ‘समग्र सतत विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं की भूमिका’ विषय पर विचार रखे। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अपूर्व नारायण ने की।

इसके बाद एनएससी का पूर्ण सत्र व्याख्यान हुआ। स्पेस फिजिक्स लेबोरेटरी, वीएसएससी, इसरो के पूर्व निदेशक डॉ. के. राजीव ने ‘पृथ्वी तंत्र और जलवायु परिवर्तन’ विषय पर व्याख्यान दिया। सत्र की अध्यक्षता आईआईटी दिल्ली के सेवानिवृत्त प्रो. प्रेम कुमार कालरा ने की।

यंग रिसर्चर फोरम में पृथ्वी और ग्रहों की रहने योग्य क्षमता पर विमर्श

यंग रिसर्चर फोरम में ब्रेमेन विश्वविद्यालय, जर्मनी के डॉ. रघु राम गुडिपाटी ने ‘एक जटिल प्रणाली के रूप में पृथ्वी: पृथ्वी की गहरी गतिशीलता और ग्रहों की रहने योग्य क्षमता’ विषय पर विस्तार से चर्चा की। सत्र की अध्यक्षता डीईआई के पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. आनंद मोहन ने की।

भोजनावकाश के साथ डीएससी प्रतिभागियों के लिए पोस्टर सत्र आयोजित किया गया। चयनित प्रतिभागियों ने निर्णायकों, गणमान्य व्यक्तियों और अन्य प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए।

इसके बाद प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों की एनएससी-डीएससी मौखिक प्रस्तुतियों के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसके पश्चात एनएससी के योगदानकर्ताओं के व्याख्यानों का प्रथम सत्र हुआ। इसकी अध्यक्षता प्रो. सुनीता मल्होत्रा, डॉ. नमिता भाटिया, सुश्री शुभांक्षी सोनकर, डॉ. सोनल सिंह और डॉ. इशांत सिंघल ने की।

‘नेतृत्व और मानवीय अनुभव’ पर अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण

बर्मिंघम विश्वविद्यालय, यूके के प्रो. एंड्रयू डेविस ने डीएससी का मुख्य व्याख्यान ‘नेतृत्व और मानवीय अनुभव’ विषय पर दिया। सत्र में प्रो. एंड्रियास नेहरिंग ने अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

इसके बाद डीएससी के तीन आमंत्रित व्याख्यान हुए। डीईआई प्रेम विद्यालय की श्रीमती प्रेम प्यारी दयाल ने ‘राधास्वामी मत, दयालबाग के वर्तमान संत सतगुरु के मानव-चेतना जागरण के लिए करुणामय प्रयास’ विषय पर विचार रखे।

डीईआई की प्रो. दयाल प्यारी श्रीवास्तव ने ‘चेतना और समकालिक अंतर्दृष्टि: अचेतन प्रसंस्करण और सचेत जागरूकता के बीच सेतु के रूप में न्यूरल समकालिकता की खोज’ विषय पर व्याख्यान दिया। डीईआई की डॉ. बानी दयाल धीर ने ‘समग्र राष्ट्रीय पुनर्जागरण की ओर: मैथिली शरण गुप्त की “भारत-भारती” का पुनर्व्याख्यान’ विषय पर प्रस्तुति दी।

न्यूरोनल इमेजिंग से गणितीय दृष्टिकोण तक शोध प्रस्तुतियां

दिन के अंतिम सत्र में डीएससी के यंग रिसर्चर फोरम में दो प्रस्तुतियां हुईं। डीईआई, आगरा के डॉ. करण नारायण ने ‘पोर्टेबल न्यूरोनल इमेजिंग का उपयोग करके ध्यान पर शोध: एक अवलोकन’ विषय पर प्रस्तुति दी। इसकी अध्यक्षता प्रो. सी.एम. मार्कन ने की।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, अमेरिका के डॉ. अनुभव नानावटी ने ‘ट्रांसफॉर्मेशन और प्रिज़र्वेशन: एक गणितीय दृष्टिकोण’ विषय पर प्रस्तुति दी। इसकी अध्यक्षता डीईआई के प्रो. गुरसरन ने की।

दिन का अंतिम प्रमुख आकर्षण डीएससी का मुख्य व्याख्यान रहा, जिसे एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रो. जेमी सी. गोरमैन ने ‘टीम डायनेमिक मेज़रमेंट सिस्टम्स’ विषय पर प्रस्तुत किया। सत्र की अध्यक्षता एरिज़ोना स्टेट यूनिवर्सिटी की प्रो. सरूप रानी माथुर ने की।

तीन दिवसीय डीएससी-एनएससी आयोजन में चेतना, विज्ञान, प्रणालियों, मानवीय अनुभव, सतत विकास, पृथ्वी तंत्र, जलवायु परिवर्तन और शोध के विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञों के बीच विचारों और शोध का आदान-प्रदान जारी रहेगा।

SP_Singh AURGURU Editor