सुगंध दशमी पर भक्ति में महका शांतिनाथ मंदिर, स्वर्ण कलश से हुआ भगवान शांतिनाथ का अभिषेक
सिकंदरा के सेक्टर-7 स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व के छठवें दिन सुगंध दशमी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। भगवान शांतिनाथ का स्वर्ण कलश से अभिषेक, सामूहिक आरती और संगीतमय पूजन हुआ। पंडित सिद्धांत जैन शास्त्री ने उत्तम संयम धर्म का महत्व समझाते हुए आत्मनियंत्रण और जीवों की रक्षा का संदेश दिया। आचार्य मांगतुंग की झांकी, रंगोली और आरती थाल सज्जा प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही।
पर्युषण महापर्व में उत्तम संयम धर्म का संदेश, आचार्य मांगतुंग की झांकी, रंगोली व आरती थाल सज्जा प्रतियोगिता ने मोहा मन
आगरा। सेक्टर-7, आवास विकास कॉलोनी, सिकंदरा स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व के अवसर पर उत्तम संयम धर्म के छठवें दिन सोमवार को सुगंध दशमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मूलनायक भगवान श्री शांतिनाथ जी के अभिषेक से हुआ। दो श्रद्धालुओं ने स्वर्ण कलश से भगवान शांतिनाथ का अभिषेक किया। इसके बाद सामूहिक आरती और संगीतमय पूजन का आयोजन हुआ। सभी धार्मिक क्रियाएं एवं विधि-विधान की प्रक्रिया मथुरा से आए पंडित सिद्धांत जैन शास्त्री ने संपन्न कराई।
संयम ही आत्मनियंत्रण का मार्ग
इस अवसर पर पंडित सिद्धांत जैन शास्त्री ने उत्तम संयम धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि अपनी इंद्रियों को सावधानीपूर्वक वश में रखना ही संयम है। व्रत और समितियों का पालन करना, मन, वचन और काय की अशुभ प्रवृत्तियों का त्याग करना तथा इंद्रियों पर नियंत्रण रखना उत्तम संयम धर्म का स्वरूप है। उन्होंने कहा कि सभी जीवों की रक्षा करने का भाव निरंतर बना रहना प्राणी संयम है, जबकि पांचों इंद्रियों और मन को नियंत्रण में रखना इंद्रिय संयम कहलाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्मचिंतन करने का आह्वान किया कि उनकी दैनिक क्रियाएं और भाव कितने संयमित हैं तथा उनके जीवन में संयम का कितना प्रभाव है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य को परिस्थितियों के अनुसार अपने व्यवहार और भावनाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। किसी कमजोर व्यक्ति से टकराव होने पर हिंसा करना अथवा किसी शक्तिशाली व्यक्ति के प्रति मन में हिंसक भाव रखना, दोनों ही संयम के विपरीत हैं। इसी प्रकार भूख लगने पर कुछ भी खा लेना, प्यास लगने पर कुछ भी पी लेना अथवा विवाद के दौरान मन में आया कुछ भी कह देना आत्मसंयम की कमी को दर्शाता है।
आचार्य मांगतुंग की झांकी ने मोहा मन
सुगंध दशमी के अवसर पर श्री शांतिनाथ युवा मंडल की ओर से भक्तामर स्तोत्र की रचना से जुड़े आचार्य श्री मांगतुंग जी की आकर्षक झांकी सजाई गई। झांकी के अनावरण का सौभाग्य ईशान इंद्र परिवार के श्री आशीष जैन एवं श्रीमती अर्चना जैन को प्राप्त हुआ। वहीं पालना झुलाने का सौभाग्य श्री संभव जैन एवं श्रीमती दीपाली जैन परिवार को मिला। इसके बाद भगवान श्री शांतिनाथ जी की भव्य आरती की गई। धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धा और उत्साह का माहौल रहा। जैन समाज के श्रद्धालुओं ने झांकी के दर्शन किए और धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
रंगोली और आरती थाल सज्जा प्रतियोगिता
कार्यक्रम के दौरान रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं और प्रतिभागियों ने आकर्षक रंगोलियां बनाकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इसके साथ ही शास्त्र एवं आरती के थाल सजाने की प्रतियोगिता भी हुई। धूप-खेवंती की धार्मिक परंपरा में श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया। कार्यक्रम में श्री शांतिनाथ युवा मंच के आलोक जैन, सिद्धार्थ जैन, मोहित जैन, जितेश जैन, विपुल जैन, प्रशांत जैन, वैभव जैन, आदिश जैन, विपिन जैन, दीपक बैनारा, सिद्धांत जैन, विशाल जैन, चंदन जैन, संजय जैन, अनंत जैन, शुभम जैन, अभिषेक जैन सहित बड़ी संख्या में सदस्य मौजूद रहे। मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने कार्यक्रम की जानकारी दी। श्री शांतिनाथ मंदिर प्रबंध कमेटी की ओर से अतुल जैन, मंत्री राकेश जैन, कोषाध्यक्ष मगन कुमार जैन, महेश चंद जैन, प्रवीण जैन, राजेश बैनाड़ा, विजय जैन निमोरब, अनिल आदर्श जैन, हेमा जैन, सतीश जैन, मनोज जैन, आशीष जैन सहित सकल जैन समाज के लोग उपस्थित रहे।
21 सितंबर को उत्तम तप धर्म की पूजा
मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 21 सितंबर 2026 को सुबह 7:30 बजे उत्तम तप धर्म की पूजा एवं अभिषेक किया जाएगा। शाम को भगवान श्री की आरती के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। उन्होंने समाज के लोगों से धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता करने का आह्वान किया।