ट्रंप को लगा जोर का झटका, एच-1बी लीजा पर 1 लाख डॉलर फीस वसूलने का फैसला अमेरिकी कोर्ट से रद्द, भारतीयों को फायदा

एच-1बी वीजा फीस मामले में यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कोर्ट ने सोमवार (8 जून) को ट्रंप प्रशासन के 1 लाख डॉलर के नए एच-1बी वीजा शुल्क को अवैध करार दिया और इसे रद्द कर दिया।

Jun 9, 2026 - 07:32
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ट्रंप को लगा जोर का झटका, एच-1बी लीजा पर 1 लाख डॉलर फीस वसूलने का फैसला अमेरिकी कोर्ट से रद्द, भारतीयों को फायदा

 वाशिंगटन। एच -1बी वीजा फीस मामले में यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी कोर्ट ने सोमवार (8 जून) को ट्रंप प्रशासन के 1 लाख डॉलर के नए एच-1बी वीजा शुल्क को अवैध करार दिया और इसे रद्द कर दिया। बोस्टन की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज लियो सोरोकिन ने यह फैसला सुनाया।

20 डेमोक्रेटिक राज्यों के अटॉर्नी जनरल के मुकदमा दायर करने के बाद मामला कोर्ट पहुंचा था। राज्यों की ओर से ट्रंप प्रशासन के नए एच-1बी वीजा आवेदन पर 1 लाख डॉलर का वार्षिक शुल्क लगाए जाने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोरोकिन ने अपने फैसले में कहा कि नए एच-1बी वीजा के लिए ली जाने वाली भारी भरकम फीस जुर्माना नहीं बल्कि एक टैक्स है। इसे जारी करने के लिए रिपब्लिकन राष्ट्रपति को कांग्रेस से कोई अधिकार प्राप्त नहीं था। इसे अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा लागू नहीं कर सकती थी।

जज ने फैसले में आगे यह भी जोड़ा कि वीजा को लेकर यह नीति ट्रंप के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा सहित प्रमुख पब्लिक सेक्टर्स के लिए हानिकारक होगी। डिस्ट्रिक्ट जज ने अपने फैसले में कहा, 'कोर्ट को यह पता चलता है कि यह नीति कांग्रेस द्वारा जरूरी अधिकार दिए बिना एच-1बी वीजा आवेदनों पर टैक्स लगाती है।'

अमेरकी सरकार ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कही है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने एक बयान में कहा कि ट्रंप प्रशासन को भरोसा है कि अपील पर यह आदेश पलट दिया जाएगा।

एच-1बी वीजा हर साल 65 हजार विदेशी कामगारों को दिया जाता है। साथ ही उच्च शिक्षा प्राप्त कामगारों के लिए तीन से 6 साल के लिए 20000 अतिरिक्त वीजा भी दिए जाते हैं। अप्रूव्ड एच-1बी वीजा में से 70 फीसदी से ज्यादा वीजा भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलते हैं। विदेशी कामगारों के लिए वीजा चाहने वाले अमेरिकी वर्कर आमतौर पर 2000 से 5000 डॉलर तक की फीस देते थे, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 लाख डॉलर का भारी शुल्क लगा दिया था।