नगर निगम के अफसरों की नींद नहीं टूटी तो शहर की सड़कों के गड्ढे भरने में जुट गये एसओएस वॊलंटियर डीके यादव
आगरा। शहर की सड़कों पर बारिश से बने जानलेवा गड्ढों को भरने के लिए जहां जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई का इंतजार है, वहीं सोल्जर्स ऑफ सोसाइटी (एसओएस) के स्वयंसेवक डीके यादव ने राहगीरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली है। उन्होंने तय किया है कि आज से रास्ते में जहां भी जानलेवा गड्ढा दिखाई देगा, उसे आसपास से मलबा जुटाकर खुद भरेंगे, ताकि कोई राहगीर दुर्घटना का शिकार न हो। आर्थिक संसाधन सीमित होने के बावजूद डीके यादव का यह प्रयास सड़क सुरक्षा को लेकर सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है।
डीके यादव ने एसओएस के संस्थापक डॉ. नवीन गुप्ता की प्रेरणा से यह काम शुरू किया है। उनके पास गड्ढों को भरने के लिए सीमेंट और कंक्रीट की व्यवस्था करने के पर्याप्त साधन नहीं हैं, लेकिन लोगों को दुर्घटनाओं से बचाने का जज्बा उन्हें सड़क पर ले आया है।
आगरा शहर में जहां भी उन्हें कोई खतरनाक गड्ढा दिखाई देता है, वे आसपास पड़ा मलबा एकत्र कर उसे गड्ढे में डालकर उस भर देते हैं। उनका मकसद इतना ही है कि सड़क से गुजरने वाले किसी व्यक्ति की गाड़ी गड्ढे में न फंसे और वह दुर्घटना का शिकार न हो।
बारिश के दौरान शहर की सड़कों की स्थिति और खराब हो गई है। जगह-जगह गड्ढे राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं। ऐसे समय में डीके यादव का छोटा-सा प्रयास उन जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है, जिन पर सड़कों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी सभी विभागों को अपनी-अपनी सड़कों के गड्ढे भरवाने के निर्देश दे चुके हैं, ताकि सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके। इसके बावजूद शहर की कई सड़कों पर गड्ढे अब भी राहगीरों के लिए मुसीबत बने हुए हैं।
डीके यादव का प्रयास इसी सरकारी जिम्मेदारी की याद दिलाता है। वे न तो किसी बड़े संसाधन के साथ सड़क पर उतरे हैं और न ही किसी औपचारिक अभियान का इंतजार कर रहे हैं। आसपास उपलब्ध मलबे से गड्ढे भरकर वे बस इतना सुनिश्चित करना चाहते हैं कि किसी की जान सड़क के एक गड्ढे की वजह से खतरे में न पड़े।
डीके यादव का यह छोटा-सा प्रयास नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों के लिए एक बड़ा संदेश है कि जब एक आम स्वयंसेवक सीमित साधनों में राहगीरों की सुरक्षा के लिए सड़क पर उतर सकता है तो जिम्मेदार तंत्र कब अपनी जिम्मेदारी निभाएगा?