विश्व स्तनपान सप्ताह 1 से 7 अगस्त तक, आगरा में माताओं को किया जाएगा जागरूक

आगरा में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग गर्भवती और धात्री महिलाओं को जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराने तथा छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने के लिए जागरूक करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार मां का दूध शिशु के संपूर्ण पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक विकास और संक्रमण से सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण आहार है।

Jul 31, 2026 - 20:25
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विश्व स्तनपान सप्ताह 1 से 7 अगस्त तक, आगरा में माताओं को किया जाएगा जागरूक

"जीवन की स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें" थीम के साथ चलेगा अभियान, छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने की अपील

आगरा। नवजात शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आगरा जिले में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग जिलेभर में विशेष जागरूकता अभियान चलाएगा, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं और हाल ही में मां बनी महिलाओं को स्तनपान के महत्व और उसके वैज्ञानिक लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम "जीवन की स्थायी शुरुआत के लिए स्तनपान: जो कारगर है उसे मजबूत करें" निर्धारित की गई है। अभियान का उद्देश्य माताओं को स्तनपान के प्रति जागरूक करना, भ्रांतियों को दूर करना और नवजात को जीवन की शुरुआत से ही सर्वोत्तम पोषण उपलब्ध कराना है।

पहले घंटे में स्तनपान कराने पर रहेगा विशेष फोकस

स्वास्थ्य विभाग की आशा, एएनएम और अन्य स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर और स्वास्थ्य संस्थानों में महिलाओं को जागरूक करेंगी। अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिशु के जन्म के पहले एक घंटे के भीतर मां का दूध पिलाया जाए और जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही दिया जाए। इस अवधि में शिशु को किसी भी प्रकार का पानी, शहद, घुट्टी, जूस, गाय-भैंस का दूध या अन्य ठोस एवं तरल आहार न देने की सलाह दी जाएगी।

सीएमओ बोले-स्तनपान से जुड़े भ्रम दूर करना भी अभियान का उद्देश्य

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को स्तनपान के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही समाज में फैली स्तनपान संबंधी गलत धारणाओं और भ्रांतियों को भी दूर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नवजात का अधिकार है कि उसे जन्म के तुरंत बाद मां का दूध मिले। मां का दूध बच्चे के संपूर्ण शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सर्वोत्तम आहार है। इसलिए हर मां को कम से कम छह माह तक केवल स्तनपान कराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मां का दूध देता है संपूर्ण पोषण और संक्रमण से सुरक्षा

डिप्टी सीएमओ (आरसीएच) डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति ने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए प्राकृतिक और संपूर्ण आहार है। इसमें प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, आयरन, खनिज, पानी और आवश्यक एंजाइम संतुलित मात्रा में मौजूद होते हैं। उन्होंने बताया कि नियमित स्तनपान से शिशु का बौद्धिक विकास बेहतर होता है, मां और बच्चे के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है तथा दस्त, निमोनिया, कान और गले के संक्रमण जैसी बीमारियों का खतरा काफी कम हो जाता है। इसके अलावा मां का दूध आसानी से पच जाता है और बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।

जन्म के बाद निकलने वाला पीला गाढ़ा दूध है अमृत

जिला महिला अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. खुशबू केसरवानी ने कहा कि जन्म के तुरंत बाद निकलने वाला मां का गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए अमृत के समान होता है। यह बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही पर्याप्त होता है। इस दौरान उसे अतिरिक्त पानी की भी आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में बच्चे के शरीर के लिए आवश्यक पर्याप्त मात्रा में तरल मौजूद रहता है। गर्मियों में भी शिशु की प्यास मां का दूध ही पूरी कर देता है।

सप्ताहभर चलेंगे जागरूकता कार्यक्रम

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों, जिला महिला अस्पताल, सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य कार्यकर्ता महिलाओं को स्तनपान की सही तकनीक, इसके लाभ और नवजात की देखभाल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी उपलब्ध कराएंगे।