दिल्ली पहुंचते ही नाले में बदल जाती है यमुना, प्रदूषण रोकने को आगरा से उठी ठोस कदम की मांग

आगरा। विश्व नदी दिवस के उपलक्ष्य में यमुना आरती स्थल पर आयोजित गोष्ठी में यमुना की लगातार बिगड़ती स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई। वक्ताओं ने कहा कि यमुना के 1378 किलोमीटर लंबे प्रवाह में हथिनीकुंड तक नदी अपेक्षाकृत स्वच्छ रहती है, लेकिन इसके आगे प्रदूषण बढ़ता जाता है। दिल्ली पहुंचते-पहुंचते यमुना एक नाले में परिवर्तित हो जाती है और आगे भी प्रदूषण का संकट बना रहता है। गोष्ठी में सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को यमुना में गिरने से तत्काल रोकने, नदी की डी-सिल्टिंग कराने, मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाने तथा नदी किनारे विसर्जन कुंड बनाने समेत कई मांगें उठाई गईं।

Sep 27, 2026 - 21:15
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दिल्ली पहुंचते ही नाले में बदल जाती है यमुना, प्रदूषण रोकने को आगरा से उठी ठोस कदम की मांग
विश्व नदी दिवस पर आगरा के यमुना आरती स्थल पर आयोजित गोष्ठी में मौजूद यमुना प्रेमी।

डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने यमुना की स्थिति पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि 1378 किलोमीटर की यात्रा के दौरान उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा में हथिनीकुंड तक यमुना का पानी अपेक्षाकृत स्वच्छ रहता है। इसके आगे नदी प्रदूषित होती जाती है। दिल्ली पहुंचते ही यमुना की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि वह एक नाले में परिवर्तित हो जाती है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली के आगे भी यमुना प्रदूषण से जूझती रहती है। इटावा के आगे चंबल, पहुज, क्वारी और सिंध नदियों के मिलने तथा हमीरपुर में केन नदी के यमुना में मिलने के बाद पानी कुछ हद तक स्वच्छ होता है। इसके बाद प्रयागराज तक नदी का प्रवाह आगे बढ़ता है।

गोष्ठी में यमुना में गिरने वाले सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट को रोकने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया गया। यमुना की डी-सिल्टिंग की पुरानी मांग को भी एक बार फिर प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए केवल योजनाएं बनाने के बजाय प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी रोक जरूरी है।

यमुना में मूर्तियों, विशेषकर प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों के विसर्जन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई। इसके साथ ही यमुना किनारे मूर्ति विसर्जन के लिए अलग से कुंडों का निर्माण कराने का सुझाव दिया गया, ताकि धार्मिक आस्था के साथ नदी की स्वच्छता भी सुरक्षित रह सके।

गोष्ठी में यमुना में किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं डालने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। इसके अलावा धोबी घाटों और यमुना में भैंसों के स्नान पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

गोष्ठी के बाद इन मांगों से संबंधित मांगपत्र के साथ विश्व नदी दिवस कार्यक्रम का समापन भव्य यमुना आरती से हुआ। आरती के दौरान यमुना की निर्मलता और उसके संरक्षण का संकल्प दोहराया गया।

इस अवसर पर डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य, चतुर्भुज तिवारी, दीपक राजपूत, मुकेश चौधरी, महंत नंदन श्रोत्रिय, रंजन शर्मा, भगवान सिंह जी सहित अन्य यमुना भक्त उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor