आगरा से दुबई तक फैला साइबर सिंडिकेट बेनकाब, पुलिस ने दबोचे अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिर

आगरा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने फर्जी CSC सेंटर के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह फर्जी CSC आईडी, लिंक और APK फाइल के जरिए लोगों को ठगता था। पुलिस के मुताबिक, आगरा में करीब 10 से 12 करोड़ रुपये और देशभर में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई है। मामले में पांच अन्य आरोपी भी पुलिस की रडार पर हैं।

Jul 22, 2026 - 16:28
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आगरा से दुबई तक फैला साइबर सिंडिकेट बेनकाब, पुलिस ने दबोचे अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिर
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।

फर्जी सीएससी  सेंटर के नाम पर 50 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी,  दूसरे राज्यों की पुलिस के नोटिस से खुला राज

आगरा। आगरा साइबर क्राइम थाना पुलिस ने फर्जी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) के जरिए देशभर में साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी सीएससी आईडी, लिंक और एपीके फाइलों के माध्यम से लोगों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहा था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सिद्धार्थनगर निवासी आयुष कुमार और उत्तराखंड के उधम सिंह नगर निवासी राजा उर्फ गुल प्रेम कुमार के रूप में हुई है। मामले का खुलासा करते हुए डीसीपी वेस्ट एवं साइबर आदित्य कुमार ने बताया कि आगरा निवासी एक व्यक्ति ने थाना साइबर में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी आईडी पर अवैध रूप से सीएससी सेंटर का संचालन किया जा रहा है।

पीड़ित को इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब हुई, जब दूसरे राज्य की पुलिस की ओर से उसे नोटिस मिला। इसके बाद उसने आगरा साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तकनीकी और डिजिटल जांच शुरू की, जिसमें एक बड़े साइबर गिरोह का खुलासा हुआ।

जांच में सामने आया कि आरोपी फर्जी सीएससी पोर्टल, नकली लिंक और APK फाइल तैयार कर लोगों को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते थे। इसके बाद उनके दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा हासिल कर साइबर ठगी को अंजाम दिया जाता था। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुलासा किया कि आगरा में ही करीब 10 से 12 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी की गई है, जबकि पूरे नेटवर्क ने देशभर में 50 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया है। गिरोह के तार हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखंड और दुबई तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है।

साइबर क्राइम पुलिस को जांच के दौरान करीब एक करोड़ रुपये के संदिग्ध CSC वॉलेट ट्रांजैक्शन के डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। पुलिस अब इन लेन-देन की गहन जांच कर रही है। मामले में पांच अन्य संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है, जिनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह लंबे समय से फर्जी CSC सेंटरों के जरिए लोगों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं का झांसा देकर ठगी कर रहा था। बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों और आर्थिक लेन-देन का पूरा ब्योरा सामने आ सके।