आगरा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का ताल में दो साल की कार सेवा के बाद खुली दर्शन ड्योढ़ी, कीर्तन-परिक्रमा और अरदास के साथ संगत को समर्पित हुआ मुख्य प्रवेश द्वार
आगरा। शहर के ऐतिहासिक गुरुद्वारा गुरु का ताल में दो वर्ष से चल रही कार सेवा के बाद मुख्य प्रवेश द्वार दर्शन ड्योढ़ी का निर्माण पूरा हो गया। रविवार को रिमझिम वर्षा के बीच कीर्तन करते हुए निकाली गई परिक्रमा दर्शन ड्योढ़ी पर पहुंची, जहां कीर्तन और अरदास के बाद इसे संगत को समर्पित किया गया। संगत ने दर्शन ड्योढ़ी से गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश कर औपचारिक उद्घाटन किया। गुरुद्वारा गुरु का ताल में अब बढ़ती संगत की जरूरतों को देखते हुए लंगर हॉल का विस्तार और अत्याधुनिक रसोई के निर्माण की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।

दर्शन ड्यौड़ी के लोकार्पण के मौके पर मौजूद संत बाबा प्रीतम सिंह और अन्य गणमान्य लोग।
दो साल की कार सेवा के बाद दर्शन ड्योढ़ी तैयार
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मुख्य प्रवेश द्वार दर्शन ड्योढ़ी के निर्माण की कार सेवा पिछले दो वर्षों से चल रही थी। निर्माण पूरा होने के बाद रविवार 6 सितंबर को कीर्तन के साथ प्रभात फेरी निकाली गई। मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह की अगुवाई और निशान साहिब के सानिध्य में निकली कीर्तन परिक्रमा दर्शन ड्योढ़ी पर पहुंची। यहां कीर्तन हुआ और अरदास के बाद संगत ने दर्शन ड्योढ़ी से गुरुद्वारा गुरु का ताल में प्रवेश किया। इसी के साथ दर्शन ड्योढ़ी का औपचारिक उद्घाटन हुआ और इसे संगत को समर्पित कर दिया गया।
ऐतिहासिक गुरुद्वारे की भव्यता में जुड़ेगा नया अध्याय
गुरुद्वारे के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि गुरुद्वारे के मुख्य प्रवेश द्वार को विशेष रूप से भव्य स्वरूप दिया गया है। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के ऐतिहासिक स्थान गुरुद्वारा गुरु का ताल की भव्यता में यह विशाल प्रवेश द्वार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां आने वाली संगत इस विशाल दर्शन ड्योढ़ी से प्रवेश करते हुए गुरुद्वारा परिसर की गरिमा और गौरव का और अधिक अनुभव करेगी।
विशाल प्रवेश द्वार पर नहीं लगाया गया कोई दरवाजा
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि दर्शन ड्योढ़ी के साथ-साथ गुरुद्वारा परिसर के भीतर मुख्य सीढ़ियों पर बने प्रवेश द्वार पर भी कोई दरवाजा नहीं लगाया गया है। मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी का कहना है कि गुरुद्वारे के द्वार हर धर्म, जाति और वर्ग के लोगों के लिए हर समय खुले हैं। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए किसी भी प्रवेश द्वार पर दरवाजा नहीं बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि कोरोना काल के दौरान भी गुरुद्वारा साहिब को एक दिन के लिए बंद नहीं किया गया था। उस दौरान जरूरतमंद लोगों और दूसरे शहरों से पैदल गुजर रही संगत के लिए यहां लगातार लंगर चलता रहा।
दोगुनी होगी लंगर हॉल की क्षमता, अत्याधुनिक रसोई बनेगी
गुरुद्वारा गुरु का ताल में स्थानीय और बाहरी संगत की लगातार बढ़ रही आवाजाही को देखते हुए लंगर हॉल के विस्तार की योजना बनाई गई है। संत बाबा प्रीतम सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में बाहरी प्रदेशों से आने वाली संगत और पर्यटकों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। इसके अलावा विभिन्न गुरु पर्वों पर स्थानीय स्तर पर भी बड़ी संख्या में संगत पहुंचती है। इसके कारण लंगर के दौरान कई बार संगत को इंतजार करना पड़ता है।
इसी समस्या के समाधान के लिए लंगर हॉल की क्षमता को दोगुना करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही अत्याधुनिक रसोई का निर्माण भी किया जाएगा। रसोई में नवीनतम तकनीक आधारित मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। गैस के स्थान पर भाप से लंगर तैयार करने की आधुनिक तकनीक अपनाने की भी योजना है। दोनों परियोजनाओं पर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
रिमझिम वर्षा में निकली कीर्तन परिक्रमा
दर्शन ड्योढ़ी के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान रिमझिम वर्षा के बीच संगत ने कीर्तन करते हुए परिक्रमा निकाली। निशान साहिब के सानिध्य में निकली प्रभात फेरी में श्रद्धालु भक्ति भाव के साथ शामिल हुए। दर्शन ड्योढ़ी पर पहुंचने के बाद कीर्तन और अरदास हुई, जिसके उपरांत संगत ने नए प्रवेश द्वार से गुरुद्वारा गुरु का ताल में प्रवेश किया।
समारोह में इनकी रही मौजूदगी
दर्शन ड्योढ़ी के उद्घाटन और अरदास के दौरान गुरुद्वारा गुरु का ताल के जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौरिया, बाबा अमरीक सिंह, ग्रंथि हरबंस सिंह, अजायब सिंह टीटू, महंत हरपाल सिंह, जोगा सिंह, ज्ञानी केवल सिंह, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कवलजीत सिंह, गुरुद्वारा माईथान के हेड ग्रंथी ज्ञानी कुलविंदर सिंह, सरदार दलजीत सिंह सेतिया, श्याम भोजवानी, वीर महेंद्र पाल सिंह, अवनीत कौर, गुरमीत सिंह सेठी, लकी सेतिया आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे।