सिकंदरा में जेसीबी से 43 पेड़ जड़ से उखाड़े, वन विभाग ने बिल्डर पर कसा शिकंजा

आगरा के सिकंदरा क्षेत्र में अकबरा रोड पर जेसीबी से 43 पेड़ों को जड़ से उखाड़ने का मामला सामने आया है। खसरा संख्या 1612, 1619, 1621 और 1622 से जुड़े इस मामले में वन विभाग की टीम ने मौके पर जांच कर साक्ष्य जुटाए। विभाग ने बिल्डर महेंद्र सिंघानिया को आरोपी बनाते हुए वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 4/10 के तहत सिकंदरा थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। मामले में टीटीजेड क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया गया है। अब पुलिस पेड़ों को हटाने की अनुमति, जमीन से जुड़े दस्तावेज और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच करेगी।

Sep 6, 2026 - 01:17
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सिकंदरा में जेसीबी से 43 पेड़ जड़ से उखाड़े, वन विभाग ने बिल्डर पर कसा शिकंजा

अकबरा रोड पर बिना अनुमति पेड़ों को हटाने का आरोप, वन विभाग ने मौके से जुटाए साक्ष्य, वृक्ष संरक्षण अधिनियम के तहत एफआईआर

आगरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में पर्यावरण संरक्षण को लेकर लागू सख्त नियमों के बीच सिकंदरा क्षेत्र से पेड़ों की कटाई का सनसनीखेज मामला सामने आया है। अकबरा रोड पर जेसीबी की मदद से 43 पेड़ों को जड़ से उखाड़ने का आरोप है। मामला सामने आने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटाए। जांच के आधार पर वन विभाग ने बिल्डर महेंद्र सिंघानिया को आरोपी बनाया है। विभाग की ओर से सिकंदरा थाने में वृक्ष संरक्षण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है। मामले में टीटीजेड क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप भी सामने आया है।

जेसीबी से एक-एक कर उखाड़ दिए गए पेड़

मामला अकबरा रोड स्थित खसरा संख्या 1612, 1619, 1621 और 1622 से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि यहां निर्माण अथवा अन्य गतिविधि के दौरान जेसीबी का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया। पेड़ों को काटने के बजाय मशीन से जड़ समेत हटाए जाने की बात सामने आने के बाद मामला वन विभाग के संज्ञान में पहुंचा। इसके बाद टीम ने मौके का निरीक्षण किया और वहां मौजूद परिस्थितियों को देखा।

मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम, जुटाए साक्ष्य

सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने संबंधित स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर पेड़ों के उखड़े होने और अन्य परिस्थितियों से जुड़े साक्ष्य जुटाए। वन विभाग की जांच में 43 पेड़ों के उखाड़े जाने की बात सामने आने के बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया। इसके बाद आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस को तहरीर दी गई।

बिल्डर महेंद्र सिंघानिया को बनाया आरोपी

वन विभाग की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर में बिल्डर महेंद्र सिंघानिया को आरोपी बनाया गया है। विभाग का आरोप है कि संबंधित भूमि पर पेड़ों को हटाने की कार्रवाई नियमों के विपरीत की गई। मामले में अब पुलिस वन विभाग की रिपोर्ट और मौके से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जांच करेगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि पेड़ों को हटाने से पहले किसी तरह की अनुमति ली गई थी या नहीं।

वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 4/10 में मुकदमा

वन विभाग ने मामले में वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धारा 4/10 के तहत मुकदमा दर्ज कराया है। पेड़ों को जड़ से उखाड़े जाने के मामले में अब संबंधित दस्तावेजों और स्थल की परिस्थितियों की जांच की जाएगी। पुलिस यह भी देखेगी कि मौके पर किस उद्देश्य से पेड़ हटाए गए और इस पूरी कार्रवाई में किन लोगों की भूमिका थी।

टीटीजेड में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का भी मुद्दा

आगरा का बड़ा हिस्सा ताज ट्रेपेजियम जोन के अंतर्गत आता है। यहां पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर विशेष प्रावधान लागू हैं। ऐसे क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों को हटाए जाने का मामला सामने आने के बाद पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वन विभाग की कार्रवाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन का आरोप भी शामिल किया गया है। ऐसे में मामला सिर्फ पेड़ों को हटाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि टीटीजेड में पर्यावरणीय मानकों के पालन की निगरानी पर भी सवाल खड़े करता है।

43 पेड़ कैसे हटाए गए, निगरानी पर सवाल

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक-दो नहीं बल्कि 43 पेड़ों को जेसीबी से जड़ समेत उखाड़ दिया गया और इसकी जानकारी संबंधित विभागों को समय रहते क्यों नहीं हो सकी? यदि मौके पर निर्माण गतिविधि चल रही थी तो क्या वहां संबंधित विभागों की अनुमति और पर्यावरणीय नियमों की जांच की गई थी? पेड़ों को हटाने की अनुमति किसने दी और क्या इसके लिए कोई वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई थी, जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे।

अब पुलिस जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर

वन विभाग की शिकायत पर सिकंदरा थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला पुलिस जांच में पहुंच गया है। अब पुलिस वन विभाग द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के साथ मौके की स्थिति, जमीन से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर सकती है। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट होगा कि 43 पेड़ों को हटाने की कार्रवाई कब की गई, इसमें जेसीबी किसकी थी और पेड़ों को हटाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था। फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद वन विभाग और पुलिस की कार्रवाई ने टीटीजेड क्षेत्र में पेड़ों की सुरक्षा और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।