खुले नाले ने ली बुजुर्ग की जान तो भड़का आक्रोश, सपा ने दी आंदोलन की चेतावनी

केदार नगर में भारी बारिश के दौरान खुले नाले में गिरने से सिंधी समाज के बुजुर्ग ओमप्रकाश की मौत के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विनय अग्रवाल ने आरोप लगाया कि समय पर नालों की डी-सिल्टिंग, सफाई, जल निकासी और खुले नाले की सुरक्षा व्यवस्था होती तो हादसा टल सकता था। उन्होंने मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने और मामले की निष्पक्ष जांच कर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो जनहित में धरना-प्रदर्शन और आंदोलन किया जाएगा। हादसे के दौरान ओमप्रकाश को बचाने के लिए नाले में उतरे समीर, जुबेर, ललित और मुकुल शर्मा के साहस की भी सराहना की गई है।

Sep 6, 2026 - 00:51
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खुले नाले ने ली बुजुर्ग की जान तो भड़का आक्रोश, सपा ने दी आंदोलन की चेतावनी

केदार नगर हादसे के बाद नगर निगम पर उठे सवाल, विनय अग्रवाल बोले- समय पर सफाई और डी-सिल्टिंग होती तो टल सकती थी मौत, परिजनों को 50 लाख मुआवजे की मांग

आगरा। केदार नगर में भारी बारिश के दौरान खुले नाले में गिरने से सिंधी समाज के बुजुर्ग ओमप्रकाश की मौत के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सपा नेता  विनय अग्रवाल ने इस हादसे को नगर निगम की लापरवाही का नतीजा बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग उठाई है।

विनय अग्रवाल के मुताबिक, उन्हें 5 सितंबर की सुबह हादसे की जानकारी मिली थी। बताया गया कि रात करीब 11 बजे केदार नगर क्षेत्र में बारिश के दौरान ओमप्रकाश नाले में डूब गए थे। इस दौरान समीर, जुबेर, ललित और मुकुल शर्मा नाम के युवकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना नाले में उतरकर उन्हें बाहर निकाला।

युवकों की बहादुरी ने बचाने की उम्मीद जगाई, लेकिन नहीं बची जान

विनय अग्रवाल ने कहा कि जब उन्हें साहसी युवकों के इस प्रयास की जानकारी मिली तो वह उनका सम्मान करने और ओमप्रकाश से मिलने के लिए केदार नगर पहुंचे। उन्हें उम्मीद थी कि समय रहते बुजुर्ग को बचा लिया गया होगा। लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद उन्हें ओमप्रकाश के निधन की जानकारी मिली। यह सुनकर उन्हें गहरा झटका लगा। उन्होंने कहा कि जिन युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बुजुर्ग को नाले से बाहर निकाला, उनकी बहादुरी सराहनीय है। उन्होंने समीर, जुबेर, ललित और मुकुल शर्मा के साहस को नमन करते हुए उनके सम्मान की बात कही।

‘खुले नाले और जलभराव आखिर कितनी जानें लेंगे?’

हादसे के बाद विनय अग्रवाल ने नगर निगम की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि शहर में खुले नाले, गड्ढे और जलभराव लगातार लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर खुले नाले और जलभराव के कारण कितनी और जानें जाने के बाद व्यवस्था जागेगी? उनका कहना है कि यदि नालों की समय से डी-सिल्टिंग और सफाई कराई गई होती, जल निकासी की उचित व्यवस्था होती और खुले नाले की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल बनाई गई होती, तो संभव है कि यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।

‘कागजों में सफाई, जमीन पर बदहाल व्यवस्था’

विनय अग्रवाल ने आरोप लगाया कि नालों की सफाई और डी-सिल्टिंग के काम का दावा कागजों में भले किया जाता हो, लेकिन बारिश के दौरान जमीन पर हालात अलग दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि आगरा को स्मार्ट सिटी बनाने के नाम पर बड़ी धनराशि खर्च होने के बावजूद शहर के कई हिस्सों में बारिश के दौरान जलभराव और खुले नाले लोगों के लिए जानलेवा बने हुए हैं। केदार नगर की घटना को उन्होंने इसी व्यवस्था की गंभीर विफलता से जोड़ते हुए कहा कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए नालों की सफाई के साथ उनकी सुरक्षा व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग

ओमप्रकाश की मौत के बाद उनके परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए विनय अग्रवाल ने सरकार और प्रशासन के सामने 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग रखी है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने अपना बुजुर्ग खोया है, उसके दर्द की भरपाई किसी भी आर्थिक सहायता से नहीं हो सकती, लेकिन संकट की इस घड़ी में परिवार को आर्थिक सहयोग मिलना जरूरी है। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

‘सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन करेंगे’

विनय अग्रवाल ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया और नालों की सफाई, जल निकासी तथा सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जनहित में आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर धरना और प्रदर्शन किया जाएगा। उनका कहना है कि शहर में लोगों की जान की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए और इसके लिए केवल कागजी कार्रवाई के बजाय जमीन पर प्रभावी इंतजाम दिखाई देने चाहिए।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल- जिम्मेदार कौन?

केदार नगर की घटना ने एक बार फिर शहर में खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। बारिश के दौरान जब सड़क और नाले का अंतर पानी में दिखाई नहीं देता, तब खुले नाले बेहद खतरनाक हो जाते हैं। ओमप्रकाश को बचाने के लिए चार युवकों का नाले में उतरना जहां मानवीय साहस की मिसाल है, वहीं उनकी मौत व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है। अगर समय रहते नाले की सफाई, जल निकासी और सुरक्षा के इंतजाम होते तो क्या ओमप्रकाश की जान बचाई जा सकती थी? अब इस सवाल का जवाब जांच और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही सामने आएगा।