यूएनएससी में व्यापक सुधार की मांग,  अड़ंगा डालने वालों को जयशंकर ने सुनाया,  भारत ने ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर दिखाया दम

भारत,  ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ग्लोबल साउथ के तीन अलग-अलग महाद्वीपों के देश हैं। ये प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और कई मुद्दों पर इनके हित एक जैसे हैं।

Sep 25, 2026 - 20:33
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यूएनएससी में व्यापक सुधार की मांग,  अड़ंगा डालने वालों को जयशंकर ने सुनाया,  भारत ने ब्राजील-दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर दिखाया दम

न्यूयॉर्क। अमेरिका में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आईबीएसए विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की मांग की है। साथ ही तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा पर संघर्षों के असर (खासकर ग्लोबल साउथ में) को लेकर चिंता जताई है और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका मिलकर आईबीएसए डायलॉग फोरम बनाते हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर, दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लमोला और ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा की गुरुवार को बैठक हुई है।

संयुक्त बयान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में व्यापक सुधार की मांग की गई, ताकि सुरक्षा परिषद ज्यादा लोकतांत्रिक और प्रतिनिधित्व वाली बने और उसमें आज की दुनिया की वास्तविक स्थिति बेहतर तरीके से दिखाई दे। तीनों देशों ने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की ज्यादा प्रभावी भागीदारी होनी चाहिए।

तीनों विदेश मंत्रियों ने दुनिया में चल रहे संघर्षों के ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई। उन्होंने खासतौर पर ऊर्जा और खाद्य असुरक्षा, महंगाई और सरकारी बजट पर बढ़ते दबाव का जिक्र किया। तीनों देशों ने ग्लोबल साउथ में रिन्यूएबल एनर्जी की क्षमता को तीन गुना करने का समर्थन किया।

तीनों मंत्रियों ने दुनिया में ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करने की रफ्तार को दोगुना करने और टिकाऊ ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाने का समर्थन किया। इनमें बायोफ्यूल, बायोगैस और कम कार्बन उत्सर्जन वाला हाइड्रोजन शामिल हैं। संयुक्त बयान में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई गई।

एस. जयशंकर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार नहीं होने को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में हताशा बढ़ रही है। इसमें सुधारों का विरोध करने वाले देशों को इसकी वास्तव में कोई परवाह नहीं है। जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र के लिए विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के न्यूयॉर्क में जुटने पर संगठन में सुधार का मुद्दा हर साल उठता रहा है लेकिन अब इसे लेकर भावना और मजबूत हो रही है।

जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में बदलाव की मांग का मूल कारण यह है कि संयुक्त राष्ट्र को समय से पीछे माना जा रहा है। यह संयुक्त राष्ट्र का विरोध नहीं है। वास्तव में जो लोग संयुक्त राष्ट्र की परवाह करते हैं, वे इसमें सुधार चाहते हैं। मेरा मानना है कि जो लोग सुधार का विरोध करते हैं, उन्हें वास्तव में संयुक्त राष्ट्र की परवाह नहीं है।

भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और इसकी स्थायी एवं अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग लंबे समय से करता रहा है। भारत का कहना है कि 1945 में गठित 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद 21वीं सदी की जरूरतों के अनुरूप नहीं है और यह मौजूदा भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती है।