सीजेपी प्रोटेस्ट मामला हाई ‘कोर्ट पहुंचा, अदालत ने कहा- कोर्ट को इसमें मत घसीटिए’, मामला बुधवार को होगा सूचीबद्ध
दिल्ली हाईकोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संसद मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल) का उल्लेख किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा, कोर्ट को इसमें मत घसीटिए, मामला कल सूचीबद्ध होगा। उधर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राम मनोहर लोहिया अस्पताल में घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों से मुलाकात की। उन्होंने अस्पताल में भर्ती घायल प्रदर्शनकारियों से भी मुलाकात की।
नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद मार्च’ के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई अब न्यायिक जांच के दायरे में पहुंच गई है। दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग किया। मामले का तत्काल उल्लेख किए जाने की मांग थी। अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार नहीं किया, बल्कि नियमित प्रक्रिया के तहत अगली तारीख पर सुनवाई का संकेत दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी ने संसद की ओर से मार्च का आह्वान किया गया था। दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट किया था कि नई दिल्ली क्षेत्र में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू है और मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर और संसद मार्ग की ओर बढ़े। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई तथा लाठीचार्ज और बल प्रयोग के आरोप सामने आए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का इस्तेमाल किया। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का कहना है कि भीड़ ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया और पुलिसकर्मियों पर भी हमला हुआ।
इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर दिल्ली हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई, जिसमें स्वतंत्र जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
लाइव लॉ की रिपोर्ट कहती है कि याचिका का उल्लेख तत्काल सुनवाई के लिए किया गया। हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीज़न पीठ के सामने यह मामला उठाया गया। इस दौरान अदालत ने कहा कि ‘ कोर्ट को इसमें मत घसीटिए , मामला कल आएगा।’ कोर्ट की यह टिप्पणी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय नहीं मानी जाएगी। अदालत ने केवल यह स्पष्ट किया कि मामला नियमित सूची के अनुसार सुना जाएगा। दरअसल भारतीय न्यायिक प्रक्रिया में ‘मेंशनिंग’ और नियमित सुनवाई अलग-अलग चरण होते हैं। यदि कोई अत्यंत असाधारण परिस्थिति न हो तो अदालतें तत्काल हस्तक्षेप से बचती हैं।
अगली सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट सबसे पहले यह देखेगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। यदि अदालत को प्रथम दृष्टया मामला बनता दिखाई देता है तो दिल्ली पुलिस से विस्तृत जवाब मांगा जा सकता है। कोर्ट आवश्यक होने पर मेडिकल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्य भी तलब कर सकता है। मामले में स्वतंत्र जांच की मांग पर भी विचार संभव है।
दरअसल यह विवाद केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है बल्कि लोकतांत्रिक विरोध और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का प्रश्न भी है। यह केवल पुलिस कार्रवाई की वैधता की बात नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध, राज्य की कानून-व्यवस्था संबंधी जिम्मेदारी और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन की परीक्षा भी है। फिलहाल अदालत ने केवल यह कहा है कि मामला नियमित रूप से सूचीबद्ध होकर सुना जाएगा।
इस बीच राहुल गांधी ने कहा, 'बात यह है कि देश के युवाओं के साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया जाना चाहिए। देश के युवाओं के पास मौके नहीं हैं, सारे दरवाज़े बंद हैं, कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम का एक दरवाज़ा खुला था, उसे भी बर्बाद कर दिया गया है। यहां मौजूद छात्र सिर्फ एजुकेशन सिस्टम के बारे में ही नहीं, बल्कि अपने भविष्य के बारे में भी शिकायत कर रहे हैं। वे मिस्टर अंबानी और मिस्टर अडानी और आरएसएस के एजुकेशन सिस्टम पर पूरी तरह कब्ज़ा करने की वजह से शिकायत कर रहे हैं। यह युवाओं के भविष्य का मामला है। वे अंबानी की शादी और वहां खर्च हुए 1000 करोड़ रुपये देखते हैं, जबकि उनके पास अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए पैसे नहीं हैं। यह मामला एजुकेशन से कहीं बड़ा है। भारत के छात्र कह रहे हैं कि भारत में उनका कोई भविष्य नहीं है। यह बात सही है। धर्मेंद्र प्रधान, गृह मंत्री और प्रधानमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।'
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। अखिलेश ने कहा कि सरकार प्रदर्शनकारी को हटा रही है, लेकिन मंत्री को क्यों नहीं हटा रही है। सरकार को दबे राज खुलने का डर है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस का व्यवहार हिटलर जैसा है। आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ। कुछ लोग सिविल ड्रेस में मार रहे थे। छात्रों को करंट लगाया गया। ये लोकतंत्र में कभी स्वीकार्य नहीं।
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि हमारे देश के हजारों छात्र पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इस सरकार ने उनके ऊपर लाठीचार्ज करवाया। उन्हें मारा-पीटा गया और उनके ऊपर आंसू गैस के गोले दागे गए. ये बहुत ही निंदनीय घटना है।
राहुल गांधी ने विपक्ष के सांसदों के साथ लोकसभा स्पीकर से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि हमारी मांग सीधी-सादी है। संसद को कल छात्रों पर हुए अत्याचार और परीक्षा संकट के लिए सरकार की पूर्ण जवाबदेहीहीनता पर विस्तृत चर्चा करनी चाहिए। छात्रों को अपने भविष्य के बारे में जायज़ सवाल पूछने पर पीटा गया। अगर संसद भारत के युवाओं के भविष्य पर चर्चा नहीं कर सकती, तो उसका क्या फायदा? राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष इसे दबाने नहीं देगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रों की आवाज़ सड़कों पर और संसद में सुनी जाए।