जंग रोकने को ईरान ने रखी शर्त, अमेरिका एक हफ्ते में होर्मुज को खोले, तेहरान ने कहा- वह झुकेगा नहीं
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष वास्तव में समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर गंभीर है तो अब हर चीज तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान झुकने वाला नहीं है।
तेहरान। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका के सामने एक प्रस्ताव रखा था, जिसमें सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और जंग रोकने की बात कही गई थी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह से रिश्तों को लेकर लक्ष्मण रेखा खींच दी है। उन्होंने कहा कि बातचीत के बाद बार-बार अमेरिकी हमलों और प्रतिबंधों के चलते ईरान को अब अमेरिका पर भरोसा नहीं रहा। उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका और इजरायल के दबाव का विरोध करना जारी रखेगा।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने इस समझौते को खारिज कर दिया है। हालांकि रॉयटर्स ने दावा किया कि दोनों देशों के अधिकारी एक चरणबद्ध योजना पर चर्चा कर रहे हैं, ताकि जहाजों की आवाजाही शुरू हो सके और अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा ले। इस समझौते के बदले ईरान को उसके जब्त (फ्रोजन) पैसे वापस मिल सकते हैं।
दूसरी तरफ, क्षेत्र में स्थिति काफी जटिल बनी हुई है। हूती हमलों से निपटने के लिए सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान के बीच आपातकालीन सैन्य बातचीत चल रही है। ऐसे समय में ईरान खुद को हूती विद्रोहियों से अलग दिखाने की कोशिश कर रहा है, जबकि साथ ही वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मुद्दे पर सीधे सऊदी अरब के साथ भी बातचीत में जुटा हुआ है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, 'ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को सात दिनों की एक ठोस योजना दी है। अगर जरूरी शर्तें पूरी होती हैं तो होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जा सकता है और सात दिनों के अंदर जहाजों की सामान्य आवाजाही बहाल की जा सकती है। अब फैसला अमेरिका को करना है। ईरान दबाव, धमकी या डराने की कोशिशों को स्वीकार नहीं करता और दबाव में अपने संप्रभु अधिकारों को नहीं छोड़ेगा।'
अराघची ने कहा कि अगर अमेरिकी पक्ष वास्तव में समझौता करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने को लेकर गंभीर है, तो मैं आपको बता सकता हूं कि अब हर चीज तैयार है। ईरान ने इससे पहले कहा था कि अगर अमेरिका उसकी कुछ शर्तें मानता है तो वह होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोल देगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत भी सात दिनों के अंदर फिर शुरू कर देगा।
अल जजीरा को दिए इंटरव्यू में पेजेशकियान ने कहा कि मौजूदा समय में कतर और पाकिस्तान ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहे हैं और तेहरान का संदेश वाशिंगटन तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये वार्ता दोनों देशों के बीच हस्ताक्षर हुए एक पुराने समझौता ज्ञापन पर आधारित है। ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिकियों को इस पर अपना रुख साफ करना चाहिए। पेजेशकियान ने स्पष्ट किया कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है और उनका विरोध जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रतिबंधों के जरिए ईरानी जनता को दबाने की सोच रहे थे, उनका आकलन पूरी तरह गलत साबित हुआ।
अमेरिका और इजरायल पर ईरान को आत्मनिर्भर बनने से रोकने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि तेहरान इन रुकावटों के बावजूद अपनी जनता के विकास और सशक्तिकरण में निवेश करना जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि ईरानियों ने अमेरिकी और इजरायली हमलों का डटकर सामना किया और आगे भी डटे रहेंगे। उनका ये बयान ऐसे समय में आया है जब तेहरान द्वारा प्रस्तावित सात दिवसीय सीजफायर को लेकर राजनयिक प्रयास ठप्प पड़े हैं।