आगरा में ‘वंडरफुल जैनिज्म 8’ में युवाओं से रूबरू हुए मुनि समत्व सागर, ‘अनसीन पावर’ के जरिए समझाया जीवन और परिस्थितियों का गहरा रहस्य
आगरा। छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में रविवार को ‘वंडरफुल जैनिज्म 8’ के विशेष सत्र में श्रमण मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज ने युवाओं को जीवन में दिखाई न देने वाली शक्तियों, कर्म और पुरुषार्थ के संबंध पर सोचने के लिए मजबूर किया। ‘द अनसीन पावर’ विषय पर संवाद करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि पूरी मेहनत के बावजूद कई बार मनुष्य को अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिलता और जीवन में घटने वाली परिस्थितियों के पीछे कौन-से कारक काम करते हैं। मुनि श्री के सवालों और संवाद से सभागार में मौजूद युवा पूरे समय जुड़े रहे और अंत में ‘प्राउड टू बी अ जैन’ के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा।
श्रमण मुनिश्री 108 समत्व सागर महाराज के अलावा मुनिश्री 108 शील सागर महाराज और मुनिश्री 108 सुप्रभात सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में आयोजित विशेष सत्र में युवाओं और महिलाओं-पुरुषों ने हिस्सा लिया। ऊर्जा और उत्साह से भरे सत्र में युवाओं ने एक स्वर में ‘प्राउड टू बी अ जैन’ का उद्घोष किया। पदाधिकारियों ने मुनि श्री का पाद प्रक्षालन किया, जबकि बालिका ने मंगलाचरण प्रस्तुत कर सत्र का विधिवत शुभारंभ किया।
‘द अनसीन पावर’ पर युवाओं से सीधा संवाद
संयुक्त धर्मसभा में मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने ‘वंडरफुल जैनिज्म 8 : युवा बदलेगा, समाज बदलेगा’ के विशेष सत्र में ‘द अनसीन पावर’ विषय को केंद्र में रखा। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि जीवन में दिखाई न देने वाली कौन-सी शक्ति ऐसी है, जो परिस्थितियों को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि हम रोज बहुत कुछ देखते हैं, लेकिन उस शक्ति के बारे में कम सोचते हैं जिसे देखा नहीं जा सकता।
मुनिश्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि मौसम किसी के लिए अच्छा हो सकता है तो किसी के लिए परेशानी का कारण। जिसे घूमने जाना है, उसके लिए बारिश का मौसम अच्छा है, जबकि जिसे अस्पताल जाना है और रास्ते में परेशानी हो जाए, उसके लिए यही मौसम कठिन बन जाता है। इस उदाहरण के जरिए उन्होंने परिस्थितियों को देखने के अलग-अलग नजरिए पर युवाओं का ध्यान आकर्षित किया।
मेहनत के बावजूद परिणाम न मिले तो सवाल उठता है
मुनिश्री ने परीक्षा और परिणाम का उदाहरण देते हुए युवाओं से संवाद किया। उन्होंने पूछा कि क्या केवल मंदिर में प्रसाद चढ़ाने से परीक्षा में सफलता मिल सकती है या सफलता के लिए पढ़ाई और मेहनत भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान को केवल बुरे समय में याद करने के बजाय अच्छे समय में भी स्मरण और आस्था बनाए रखनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं से यह भी सवाल किया कि कई बार पूरी मेहनत करने के बावजूद अपेक्षित परिणाम क्यों नहीं मिलता। इसके पीछे काम करने वाली अदृश्य शक्ति को समझने की जरूरत है। प्रवचन के दौरान उन्होंने कर्म, पुरुषार्थ और जीवन में घटने वाली परिस्थितियों को लेकर युवाओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।
‘पत्ता-पत्ता किसकी मर्जी से हिलता है’ पर मंथन
मुनि श्री ने सभा में मौजूद लोगों से पूछा कि जगत में जो कुछ होता है, क्या वह भगवान की इच्छा से होता है। इसी क्रम में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि हर घटना को केवल ईश्वर की इच्छा मान लिया जाए तो मनुष्य के कर्म और उसकी जिम्मेदारी का क्या स्थान रह जाता है।
विजय शास्त्री ने किया मंच संचालन
कार्यक्रम का मंच संचालन विजय शास्त्री ने किया। आयोजन में श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, रमेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, चक्रेश जैन, सतेंद्र जैन (साहुल), आशीष जैन (बाबा), राजीव जैन, सचिन जैन (तार), आशु (वी.के), रोहित जैन, नितिन, दीपक, सनी, अनिकेत, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समस्त मंडल एवं सकल जैन समाज के लोग मौजूद रहे।