कदम्ब से हरियाली का संकल्प: पालीवाल पार्क से उठी टीटीज़ेड में हरित क्रांति की आवाज, हर पेड़ पर क्यूआर कोड और देशी वृक्षों पर जोर

आगरा। पालीवाल पार्क में आयोजित वृक्षारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम में टीटीज़ेड क्षेत्र का वनावरण बढ़ाने, निजी भूमि पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहन देने, सार्वजनिक स्थलों पर प्रत्येक वृक्ष पर क्यूआर कोड लगाने तथा विलायती बबूल हटाकर देशी प्रजातियों के वृक्ष लगाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। कार्यक्रम में कदम्ब का पौधा रोपकर पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का संकल्प लिया गया।

Jul 22, 2026 - 20:02
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कदम्ब से हरियाली का संकल्प: पालीवाल पार्क से उठी टीटीज़ेड में हरित क्रांति की आवाज, हर पेड़ पर क्यूआर कोड और देशी वृक्षों पर जोर
पालीवाल पार्क में बुधवार को आयोजित कार्यक्रम में वृक्षारोपण करते पर्यावरण प्रेमी।

बुधवार सुबह 8 से 9:30 बजे तक पालीवाल पार्क में आयोजित कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी (सामाजिक वानिकी) राजेश कुमार एवं सरकारी उद्यान अधीक्षक रजनीश पाण्डेय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने, सार्वजनिक उद्यानों के संरक्षण तथा जनभागीदारी को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कदम्ब रोपकर किया हरित अभियान का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं प्रातः भ्रमणकर्ताओं ने संयुक्त रूप से कदम्ब के पौधे का रोपण कर किया। इसके बाद सभी ने प्रातः भ्रमणकर्ताओं के सहयोग से विकसित 'कदम्ब खण्डी' का अवलोकन किया।

बताया गया कि इस विशेष स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय कदम्ब तथा राधारानी के प्रिय तमाल के 300 से अधिक पौधे विकसित किए गए हैं। प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य तभी सफल होंगे, जब समाज की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होगी।

टीटीज़ेड में केवल तीन प्रतिशत वनावरण पर चिंता

कार्यक्रम के दौरान चर्चा में बताया गया कि ताज ट्रेपेजियम ज़ोन (टीटीज़ेड) में वर्तमान वनावरण लगभग तीन प्रतिशत ही है, जो पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद कम है। वक्ताओं ने कहा कि केवल सरकारी भूमि पर वृक्षारोपण से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेंगे। निजी भूमि स्वामियों को भी बड़े स्तर पर वृक्ष लगाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा।

इस दौरान सुझाव दिया गया कि वन विभाग एवं टीटीज़ेड प्राधिकरण सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष वर्तमान व्यवस्थाओं एवं आदेशों की समीक्षा का अनुरोध करें, ताकि निजी भूमि पर वृक्षारोपण को अधिक बढ़ावा मिल सके। इस पर प्रभागीय वनाधिकारी राजेश कुमार ने सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया।

वृक्षारोपण में पारदर्शिता और QR कोड लगाने का सुझाव

पर्यावरण प्रेमी एवं अधिवक्ता के.सी. जैन ने कहा कि वृक्षारोपण अभियान केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके संरक्षण, जीवित रहने की स्थिति और नियमित निगरानी की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इससे लोगों का सरकारी अभियानों पर विश्वास बढ़ेगा।

उन्होंने सुझाव दिया कि सार्वजनिक उद्यानों एवं प्रमुख सड़कों पर लगे प्रत्येक वृक्ष पर स्थानीय नाम, वानस्पतिक नाम तथा QR कोड सहित नामपट्ट लगाए जाएं। QR कोड स्कैन करने पर वृक्ष की प्रजाति, आयु, औषधीय उपयोग, पर्यावरणीय महत्व, फूल और फल आने का समय सहित अन्य वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध हो। उन्होंने कहा कि इससे नई पीढ़ी प्रकृति के और अधिक निकट आएगी।

विलायती बबूल हटाकर देशी प्रजातियों को बढ़ावा

बैठक में विलायती बबूल को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि यह विदेशी आक्रामक प्रजाति पालीवाल पार्क के अलावा शाहजहाँ गार्डन, सर्किट हाउस परिसर, यमुना किनारा मार्ग के पार्कों तथा संजय प्लेस स्थित संजय पार्क सहित कई सार्वजनिक स्थलों पर तेजी से फैल चुकी है।

वक्ताओं ने बताया कि टीटीज़ेड प्राधिकरण पहले ही ऐसी विदेशी एवं आक्रामक प्रजातियों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर उनके स्थान पर देशी एवं पर्यावरण के अनुकूल वृक्ष लगाने का निर्णय ले चुका है। इस पर राजेश कुमार और रजनीश पाण्डेय ने आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया।

जनभागीदारी से ही सफल होगा हरित अभियान

कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी विभागों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। वृक्षारोपण तभी सार्थक होगा, जब लगाए गए पौधों का वर्षों तक संरक्षण और संवर्धन सुनिश्चित किया जाए।

कार्यक्रम में किशोर जैन, डॉ. संजीव गोयल, प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. मुकुल पंड्या, डॉ. मानसी राय, डॉ. अनिल अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में प्रातः भ्रमणकर्ता, पर्यावरण प्रेमी और नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने शहर को अधिक हरित एवं स्वच्छ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान संस्कृत का संदेश "वृक्षो रक्षति रक्षितः" भी दिया गया, जिसका अर्थ बताया गया कि जो वृक्षों की रक्षा करता है, वृक्ष उसकी रक्षा करते हैं। अंत में यह संकल्प लिया गया कि वृक्षारोपण केवल एक दिन का अभियान न रहकर जन-आंदोलन बने और प्रत्येक नागरिक कम से कम एक वृक्ष लगाकर उसके संरक्षण का दायित्व भी निभाए।

SP_Singh AURGURU Editor