संसद में नीट विवाद को लेकर स्थगन प्रस्ताव, हिबी ईडन व मणिक्कम टैगोर ने रखा प्रस्ताव, रिजिजू बोले- चर्चा को तैयार सरकार
कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन और मणिक्कम टैगोर बी ने बुधवार को लोकसभा में नोटिस प्रस्तुत कर छात्रों के खिलाफ मनमाने ढंग से एफआईआर दर्ज किए जाने पर चर्चा की मांग की। लोकसभा स्पीकर को पत्र लिख मांग की कि मांगों पर चर्चा हो, धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा हो और परीक्षा विफल होने की जिम्मेदारी ली जाए। विपक्ष की मांग को देखते हुए सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार हो गई लेकिन विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा।
नई दिल्ली। कांग्रेस के सांसद हिबी ईडन और मणिक्कम टैगोर बी ने बुधवार को लोकसभा में नोटिस प्रस्तुत कर नीट-यूजी 2026 और यूजीसी नेट परीक्षाओं में गड़बड़ियों के बाद छात्रों के शैक्षणिक भविष्य और सुरक्षा की रक्षा करने में भारत सरकार की विफलता, दिल्ली में विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ मनमाने ढंग से एफआईआर दर्ज किए जाने पर चर्चा करने की मांग की। वहीं नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर बुधवार को संसद में हंगामा देखने को मिला। विपक्ष की मांग को देखते हुए सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार हो गई लेकिन विपक्ष धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी।
लोकसभा स्पीकर को संबोधित करते हुए सांसद मणिक्कम टैगोर बी ने लिखा, "नीट-यूजी 2026 और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताओं से उत्पन्न लगातार संकट के परिणामस्वरूप छात्रों के बहुमूल्य जीवन का नुकसान, 23 लाख से अधिक छात्रों के शैक्षणिक भविष्य की रक्षा करने में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ( एनटीए ) की घोर विफलता और इसके बाद दिल्ली में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने पर सदन सामान्य कामकाज को रोककर चर्चा किए जाने की आवश्यकता है।
लाखों उम्मीदवारों के लिए आयोजित नीट यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक की पुष्टि हुई, जिसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के अधिकारी भी शामिल पाए गए। इसके कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी और देश भर में मची खलबली के बीच इसे दोबारा आयोजित करना पड़ा।
यूजीसी-नेट परीक्षा में भी इसी तरह की गड़बड़ियां सामने आईं, जिससे भारत की केंद्रीय टेस्टिंग संस्थाओं की विश्वसनीयता पर संकट गहरा गया और राष्ट्रीय परीक्षाओं की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा डगमगा गया। इस स्थिति से पैदा हुए तनाव, अनिश्चितता और अन्याय के कारण कई छात्रों के आत्महत्या करने की खबरें सामने आई हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने खुद सार्वजनिक रूप से संस्थागत विफलता को स्वीकार किया है फिर भी उन्होंने इस्तीफा देकर नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया है।
प्रणालीगत सुधारों के बार-बार आश्वासनों के बावजूद, कोई निश्चित परीक्षा कैलेंडर, एनटीए का संरचनात्मक सुधार, या पीड़ित मुआवजा ढांचा लागू किया गया है। जो छात्र और नागरिक समाज समूह अपना विरोध दर्ज कराने के लिए संसद तक शांतिपूर्ण मार्च कर रहे थे, उन पर बल प्रयोग किया गया और बाद में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गईं। इस तरह युवा नागरिकों के जायज़ लोकतांत्रिक विरोध को आपराधिक बना दिया गया, जबकि सरकारी विफलता के कारण उनका भविष्य पहले ही खतरे में पड़ चुका है।
वहीं, सांसद हिबी ईडन ने लोकसभा स्पीकर को लिखे पत्र में कहा, "मैं संसद के पास विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामले पर चर्चा करने के लिए 'स्थगन प्रस्ताव' पेश करने के अपने इरादे की सूचना देता हूं। यह सदन हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की परेशान करने वाली खबरों पर मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकता, जो देश की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में कमियों के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे थे।"
संसदीय कार्य मंत्री किरण रीजीजू ने लोकसभा में कहा कि सरकार नीट पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार। लेकिन नीट पेपर लीक मामले और प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण बुधवार को लोकसभा की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे तक स्थगित। लोकसभा में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'पिछले तीन दिनों से हम कह रहे हैं कि सरकार नीट पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। पहले दिन से ही हम कह रहे हैं कि चर्चा नियमों के मुताबिक होनी चाहिए। चर्चा कब होगी, कितनी देर तक चलेगी और किस नियम के तहत होगी, यह सब सभी पार्टियों के फ्लोर लीडर्स से बातचीत के बाद तय किया जाना चाहिए। सरकार नीट पेपर पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए तैयार है। देश के युवाओं के भविष्य के लिए एक रचनात्मक चर्चा होनी चाहिए - सरकार यही चाहती है।'