बेटी दिवस पर कृति सेनन ने कहा, बेटियों को बिना डर आने- जाने का हक मिले, पूछा, कब बेटियां बिना डर के जी पाएंगी?
बेटी दिवस पर कृति सैनन ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि बेटियां तभी आजादी से जी सकेंगी, जब उन्हें सार्वजनिक जगहों पर डर के बिना आने-जाने और रहने का हक मिले।
मुंबई। बेटी दिवस के मौके पर बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने बेटी दिवस मनाने के पारंपरिक तरीके पर सवाल उठाते हुए समाज से सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बनी चिंताओं पर ध्यान देने की अपील की।
इंस्टाग्राम पर शेयर की गई कई तस्वीरों वाली पोस्ट में कृति सैनन ने बताया कि आज युवा महिलाओं को किस तरह हर समय सतर्क रहना पड़ता है। उन्होंने रोजमर्रा की उन परेशानियों को सामने रखा, जिनका सामना कई लड़कियां करती हैं। उन्होंने लोगों से सोचने को कहा कि अगर कोई बेटी फोन करके कहे कि कुछ पुरुष उसका पीछा कर रहे हैं, वह अकेले घर जाते समय बार-बार पीछे मुड़कर देखे या सुरक्षित जगह पहुंचने से पहले उसके फोन की बैटरी खत्म होने लगे, तो उसे कैसा महसूस होगा।
कृति सैनन ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अपनी लाइव लोकेशन शेयर करने से लेकर, पेपर स्प्रे साथ रखने तक, पैदल जाने की जगह कैब बुक करने या सिर्फ सुरक्षित महसूस करने के लिए किसी को फोन करने तक हमने उसकी जिंदगी को ऐसा बना दिया है कि ये सब उसकी रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन गया है।'
अभिनेत्री ने कहा कि असली मायने में बेटी दिवस तभी मनाया जा सकेगा, जब महिलाएं बिना किसी डर के सार्वजनिक जगहों पर आजादी से रह सकें। उन्होंने कहा, 'जिस दिन कोई बेटी रात में अकेले घर जा सके, अंधेरा होने के बाद पार्क में बैठ सके, अपनी पसंद के कपड़े पहन सके, बिना डर के सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कर सके या किसी सार्वजनिक जगह पर बिना इस डर के रह सके कि उसके साथ कोई गलत घटना हो सकती है, उस दिन हमें बेटी दिवस मनाना चाहिए।'
अपने संदेश के अंत में कृति सैनन ने ऐसे भविष्य की उम्मीद जताई, जहां महिलाओं को कहीं आने-जाने के बाद ' मैं पहुंच गई हूं' का मैसेज भेजकर अपनी सुरक्षा की जानकारी देने की जरूरत न पड़े। उन्होंने लिखा, 'यही वह दुनिया है जिसके हकदार हमारी बेटियां हैं! और यही वह दुनिया है जो हम पर उनका कर्ज है।'
कृति सैनन की इस पोस्ट को सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रिया मिली है और इसने महिलाओं की सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर समाज की जिम्मेदारी जैसे जरूरी मुद्दों पर बातचीत को बढ़ावा दिया है।